आर्दभूमि संरक्षण दिवस पर विशेष- जल पारिस्थितिकी, जीव पारिस्थितिकी, पादप पारिस्थितिकी व मृदा पारिस्थितिकी के क्षरण को रोकने हेतु किडनी एवं धमनियों की तरह काम करती हैं आर्द्रभूमियां
शासन द्वारा नामित जिला गंगा समिति के सदस्य एवं जननायक चन्द्रशेखरविश्वविद्यालय ,बलिया के 'लोकपाल' पर्यावरणविद् डा० गणेश पाठक ने एक भेंटवार्ता में बताया कि आर्द्र- भूमियां किसी भी क्षेत्र की जैवविविधता, पारिस्थितिकी एवं भू-गर्भ जल को सुरक्षित एवं सम्वर्द्धित कर दीर्घ काल तक संचित बनाए रखते हुए न केवल मानव के लिए जल उपलब्ध करातीं हैं, बल्कि आहार को भी उपलब्ध कराती हैं एवं अन्य जीव जंतुओं के लिए भी जीवन का आधार बनती हैं। आर्द्र भूमि वह भूमि होती है,जहां वर्ष में 8 माह जल भरा रहता है। इस तरह जल से संतृप्त भू-भाग को ही आर्द्र-भूमि कहा जाता है।