अब देश में लोकतंत्र पर भारी पड़ रहा कर्मचारी व नेताओं का लूट तंत्र
लोकतंत्र की स्थापना यह सोचकर की गयी थी कि संविधान कि मंसा के अनुरूप देश चलेगा. हमारे देश के हर नागरिक को समान अधिकार होगा. लेकिन यहां तो अफसरों को लूट करने कि आजादी दे दी गयी है. कितना भी बोली लगाओ बस सरकार कि छबि ख़राब न हों. अब तो अफसरों ने लूट खसोट का जरिया बनाया लिया है. अगर यही चलता रहा तो भ्रष्टाचार चरम पर होगा. एक तरफ योगी सरकार भ्रष्टाचार पर नकेल कि बात करती है. लेकिन जिले में तैनात अफसरों की टीम घूस को ही लाइसेंस देने पैमाना मानकर आम लोगों को मुश्किलों में डाल रखा है.