बलिया : ब्रिटिश हुकूमत को उखाड़ फेंक कर क्राउन के समानांतर की सरकार बना लेने की घटना को जानकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू चकित रह गईं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से वार्तालाप के दौरान बलियावासी युवा लेखक धर्मराज गुप्ता ने युक्त एतिहासिक घटना का जिक्र करते हुए उन्हें बताया कि 1942 के अगस्त माह में गाँधी जी के आह्वान पर बलिया में जो क्रांति हुई उसकी मिशाल और कहीं नहीं मिलती। पुरे देश में सिर्फ यूपी का बलिया, महाराष्ट्र का सतारा, और पश्चिम बंगाल का मिदनापुर सबसे पहले आजाद हो चूका था.

इसे अंग्रेजों ने कुछ समय बाद एक साजिश के साथ पूरी तैयारी कर कुचल दिया था. जिसमें जिले के करीब 84 लोग शहीद हो गए। शहीद होने वालों में बलिकाएं एवं महिलायें भी रहीं। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के पूछने पर लेखक धर्मराज ने उन्हें बताया कि सभी अविस्मरणीय घटनाओं का उल्लेख याद करूँ तो 1942 बलिया की क्रांति पुस्तक में किया गया है। उन्होंने युवा लेखक को बधाई दी। इस वार्तालाप से बलिया के लेखकों एवं साहित्यकारों में हर्ष व्याप्त है, उन्हें शुभकामनाएं दी गई। धर्मराज गुप्ता मनियर ब्लाक में स्थित चोरकैन्ड गाँव के निवासी हैं। साहित्य जगत में अपनी अलग पहचान बनाने में कामयाब लेखक की पंक्ति में उन्हें यह सम्मान व अवसर मिला है. जिसकी चहुओर चर्चा है. अपने जनपद के इस होनहार युवा की इस गौरवशाली उपलब्धि पर स्थानीय साहित्यकारों एवं बुद्धिजीवियों में हर्ष व्याप्त है।
धर्मराज ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने माता उर्मिला देवी तथा पिता कन्हैया प्रसाद के अलावा अपने मार्गदर्शक अशोक गुप्ता पत्रकार, कवि शशि प्रेमदेव, शिव जी पाण्डेय रसराज आदि को दिया है। उन्हें बधाई देने वालों में दिल्ली के पत्रकार उमेश द्विवेदी, कोलकाता के पूर्व पत्रकार विनय बिहारी सिंह, यशवंत कुमार सिंह, शत्रुघ्न पाण्डेय, सत्यांश उपक्रम के सत्यमोहन श्रीवास्तव, कवयित्री कादम्बिनी सिंह, लेखक नवचंद तिवारी, सूर्यदेव सूरज, शिवाजी, गुर्वेन्द्र, अनिमेष, बबलू गुप्ता आदि प्रमुख रहे।