हिंदी से अनूठा प्रेम रखने वाले गुरूजी ने लिखी अपनी आत्मकथा कलम चलती रहे...
विज्ञान व गणित के प्रवक्ता होने के बावजूद हिंदी साहित्य में रूचि होना, एक बहुत बड़ी उपलब्धि है. उसे कागज पर लिखकर उपन्यास और कथा के रूप समाज की कुरीतियों को बताना एक कला है. लेकिन बहुत कम लोगों के पास ऐसी अद्भुत काला मिलती है.ऐसे ही कला के धनी जिले के साहित्यकार, उपन्यास लेखक व व्यंग्यकार अवकाश प्राप्त प्रवक्ता रमेश चंद श्रीवास्तव है. जिन्होंने अब तक दर्जनों पुस्तकों का संपादन अपनी कलम से किया है.विज्ञान व गणित के बीच हिंदी साहित्य में रूचि रखने वाले रमेश चंद वास्तव में गुरूजी की भूमिका आज भी निभा रहे हैं.उन्होंने अपनी आत्मकथा कलम चलती रहे में अपने जीवन सभी उतार-चढ़ाव को बखूबी कलम से उतरने के कार्य किया है.