बलिया. मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट पराग यादव की अदालत मारपीट कर गंभीर रूप से घायल करने के मामले में दोष साबित करने में अभियोजन पक्ष के असफल रहने पर तीन आरोपियों को बाइज्जत बरी करने का आदेश दिया है.
अभियोजन कथानक इस प्रकार है कि वादी मुकदमा प्रमोद शंकर सिंह पुत्र विन्देश्वरी सिंह एक अवकाश प्राप्त कालेज शिक्षक है। उमाशंकर जायसवाल, संजीत तथा अजीत यादव दरवाजे पर आकर नाली पर रखी पटिया और जाली आदि तोड़कर वादी मुकदमा को गाली-गुप्ता दिये एवं जान से मारने की धमकी देकर वादी को अपमानित किये। यह 5 बजकर 30 मिनट पर वर्षा होने के बाद हुई है।
चकखान के सड़क के किनारे जहां निकास के लिए नाली बनी है और वह नाली चेयरमैन सिकन्दरपुर एवं जे.ई. साहब के देखरेख के बाद बनी हुई है। इन लोगों के घर का लेवल नीचे है और चेयरमैन तथा जे.ई. के कहने पर भी ये लोग अपना जल निकाल का लेवल उँचा नहीं कर रहे है और जलनश मुझे अक्सर उलाहना देते हैं कि नाली क्यों उँची बनायी गयी है।
आरोप लगाया था कि रंजिशवश मेरे दरवाजे पर आकर तोड़फोड़ किया गया है इसी बात को लेकर मेरे लड़के दुर्गा शंकर सिंह को मारा गया है। वादी द्वारा घटना की लिखित सूचना थाने पर दिया गया जिसके आधार पर प्रथम सूचना रिपोर्ट थाना सिकन्दरपुर पर मु.अप. संख्या-417/2014 धारा-324, 323, 504, 506, 427 भा.द.वि. में दर्ज हुई। इस मामले में अभियोजन पक्ष के असफल रहने पर तीन आरोपियों को बाइज्जत बरी करने का आदेश दिया है. बचाव पक्ष कि ओर से अधिवक्ता धनंजय सिंह ने तर्क प्रस्तुत किया.
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