
केंद्रीय बजट 2022: युवा, बेरोजगार शिक्षक, कर्मचारियों, गृहिणी, किसानों, कामगारों की अनदेखी
बलिया। केंद्र सरकार के केंद्रीय बजट 2022 में न तो युवाओं के लिए कुछ है न तो बेरोजगार के लिए है। बजट में हर वर्ग की अनदेखी की गयी है। शिक्षक, कर्मचारियों, किसानों, कामगारों सहित माध्यम वर्ग को आजादी के 75 साल पूरे होने के बाद भी अमृत काल में कुछ नहीं मिला है। इस बजट में शिक्षक, कर्मचारियों, किसानों,बेरोजगारों,कामगारों सहित माध्यम वर्ग और निम्न वर्ग वालों के लिये कहीं भी अमृत छलकता नहीं दिख रहा है। इस बजट से घरों में रह रही आधी आबादी यानी गृहणी भी मायूस हैं।पीपीपी के जरिये अमृत कलश केवल पूंजीपतियों के लिये बरसने की कोशिश की गई है।
केंद्रीय बजट 2022 की समीक्षा करते हुए विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष डॉ. घनश्याम चौबे ने कहा कि 2022 के केंद्रीय बजट को पूंजीपतियों के विकास का बजट कहा जा सकता है।
2022 के आम बजट को बजट की अपेक्षा काल्पनिक साहित्य की संज्ञा दी जा सकती है।
बजट में मध्यमवर्ग के लिए आयकर में छूट में बृद्धि की जानी चाहिए थी क्योंकि इस वर्ग ने कोरोना काल में काफी नुकसान उठाया है। इस वर्ग में छोटे व्यापारी, शिक्षक ,कर्मचारी और स्वरोजगार में लिप्त लोग हैं। जिनका मनोबल बढाया जाना आवश्यक था। टैक्स स्लैब का दायरा बढा कर अर्थव्यवस्था के विकास में तेजी लाई जा सकती थी। इस बजट से किसान, बेरोजगार, नौकरी पेशा के लोगों को निराशा हाथ लगी है साथ ही महंगाई से राहत दिलाने के लिये कोई प्रयास नही किया गया है।
इस बजट में जन सुविधाओं के लिए कोई चर्चा नही की गई है।आर्थिक सर्वे को देख जाय तो गरीबी बढ़ी है और टैक्स का दायरा भी बढ़ा है।PPP मॉडल(प्राइवेट-पब्लिक-पार्टनरशिप) हर क्षेत्र में प्राइवेट सेक्टर के प्रादुर्भाव को अवसर मुहैया कराएगा। जबकि जन कल्याणकारी पब्लिक सेक्टर के लिए इस बजट में कोई प्राविधान नहीं है।
कार्पोरेट टैक्स को कम कर पूंजीपतियों को बूस्टर डोज़ दिया गया है जब कि नौकरी पेशा के लोगों के लिए टैक्स स्लैब में कोई राहत नही दी गई है। नई शिक्षा नीति 2021 के आधारभूत ढाँचे को मजबूत करने के लिए इस बजट में कोई प्राविधान नही किया गया है। यह बजट जनसामान्य को आर्थिक शक्ति प्रदान करने में फेल है।
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