महकमे की उदासीनता देख कर हर कोई परेशान

बलिया : जिला अस्पताल के पास राजकीय इंटर कॉलेज के सामने बायोमेडिकल वेस्ट खुलेआम फेंका जा रहा है. इसके लिए कहीं न कहीं नपा, जिला प्रशासन व पर्यावरण विभाग के अफसर जिम्मेदार हैं. इस प्रकरण में कोई एक्शन नहीं लिया जाना यक्ष प्रश्न बना हुआ है. विभागीय अफसरों की उदासीनता देख कर हर कोई परेशान है, लेकिन आम जनता को सिर्फ जिला प्रशासन व नगर पालिका प्रशासन पर ही गुस्सा आता है. पर्यावरण विभाग के जिम्मेदार अफसरों की उदासीनता के चलते पैथोलॉजी तथा अस्पतालों के कूड़े कचरे को खुले आम सड़क पर फेंक दिया जाता है. जबकि मानक के अनुरूप चल रहे निजी अस्पतालों को हर साल बायोमेडिकल से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना पड़ता है.

मानक पुरानी करके संचालित किए जाने वाले अस्पतालों को इस अनापत्ति प्रमाण पत्र के लिए जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा तरह-तरह से परेशान करने के बाद बायो मेडिकल का अनापत्ति प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है. जबकि जिला अस्पताल के पास तमाम पैथलॉजी बिना पंजीकरण के भी संचालित हो रहे है.

सबसे दिलचस्प है कि सदर अस्पताल मार्ग से होकर जिले के आला अधिकारी से लेकर स्वास्थ्य महकमे के चिकित्सा विभाग के आला अधिकारी व चिकित्सा अधिकारी आते जाते हैं. लेकिन इस मुद्दे पर कभी भी कोई कार्रवाई नहीं की जाती है. इस कूड़े के ढेर को देखने से साफ पता चलता है कि बायो मेडिकल वेस्ट उठाने के लिए अधिकांश संस्थाओं द्वारा लाइसेंस नहीं लिया गया है. इसके लिए आखिर जिम्मेदार कौन है. यह आमजन के समय से परे है.

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वही पर्यावरण विभाग के अफसर अपने-अपने विभागों में केवल कागजी फरमान जारी करने में मशगुल है यही नहीं यह कूड़ा कचरा शहर के कई अन्य हिस्सों में भी फेंका जाता है. नगर से होकर गुजरने वाले कटहल नाला में भी पूरा कचरा वह बायोमेडिकल वेस्ट देखा जाता है जिस रोग पानी में पर्यावरण महात्मा पूरी तरह असफल साबित हो रहा है इसके लिए एनजीटी में पर्यावरण विभाग के अफसर पर कार्रवाई करने का निर्देश भी शासन प्रशासन के अवसरों को दिया था. लेकिन अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गयी.