अटेवा की पदयात्रा को लेकर विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष का बड़ा ऐलान

बलिया। देश के सांसद,विधायक व मंत्रियों को नहीं बल्कि देश के श्रम करने वाले कर्मचारियों को पेंशन दी जानी चाहिए। यह उनका हक है। कारण कि सांसद और विधायक कर्मचारियों की श्रेणी में नहीं आते है। विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन जिलाध्यक्ष डॉ. घनश्याम चौबे ने मीडिया के लोगों से बातचीत के दौरान बताया कि अटेवा पेंशन बचाओ मंच बलिया द्वारा पेंशन बहाली एवं निजीकरण भारत छोड़ो पद यात्रा में भाग लेने हेतु विशिष्ट बीटीसी शिक्षक वेलफेयर एसोसिएशन से निर्धारित कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु पत्र देकर कार्यक्रम में आमंत्रित किया गया था। जिसपर डॉ. घनश्याम चौबे ने 22 अक्टूबर को निर्धारित पदयात्रा में शिक्षकों से अधिकाधिक संख्या में भाग लेने का आह्वान किया है। उन्होंने कहा कि फांसीवादी सरकार किसी भी हालत में नहीं चलेगी। यह देश का दुर्भाग्य है कि श्रम करने वले मजदूरों का कई दशक खून चूसने के बाद भी सरकार को पुरानी पेंशन बहाल करने में कष्ट हो रहा। इन्ही लोगों की सरकार ने हमारी पुरानी पेंशन को खत्म किया था।

डॉ. घनश्याम चौबे ने कहा कि एसोसिएशन पुरानी पेंशन बहाली के लिये पहले से ही विभिन्न स्तरों पर संघर्ष करता रहा है। डॉ. चौबे ने कहा कि राष्ट्र में एक संविधान, एक प्रधान फिर दो विधान कैसे? जहाँ मंत्री, विधायक और सांसद को पुरानी पेंशन की व्यवस्था लागू है, वहीं शिक्षक कर्मचारियों के लिये नई पेंशन व्यवस्था क्यों ? वर्तमान समय में सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रीय उद्योगों एवं सम्पतियों को निजी हांथों में सौंपा जा रहा है। अत्यधिक निजीकरण भारतीय संविधान की प्रस्तावना में वर्णित शब्द लोककल्याणकारी राज्य की स्थापना में बाधक है। कहा कि जहां निजीकरण होगा, वहां सामाजिक मूल्यों को हाशिए पर छोड़ दिया जाएगा। कुछ निजी कंपनियों का वित्तीय साम्राज्यवाद बढ़ जाएगा, यही आगे चलकर एकाधिकार में वृद्धि करेगा और समाज में असमानता की खाई को बढ़ाएगा।