शहीद स्मारक से विश्वविद्यालय तक का सफर; पढ़ाई, परीक्षा और कृषि में होगा एआई का इस्तेमाल
बलिया। शहीद स्मारक से लेकर जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय के स्वरूप लेने तक का सफर भले ही लंबा रहा हो, लेकिन अब विश्वविद्यालय की तस्वीर तेजी से बदल रही है। तकनीकी सुधारों और अकादमिक गतिविधियों के विस्तार के बीच जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बहुत जल्द आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) से लैस होने जा रहा है। विश्वविद्यालय में पढ़ाई, परीक्षा और कृषि संकाय में एआई के इस्तेमाल की तैयारी की जा रही है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ला का तकनीकी पृष्ठभूमि से होना भी विश्वविद्यालय में तकनीकी बदलावों को गति दे रहा है। कभी खंडहरनुमा नजर आने वाले परिसर में अब अकादमिक गतिविधियां तेजी से आकार ले रही हैं। विश्वविद्यालय तक पहुंचने वाले मुख्य मार्ग के साथ ही परिसर के अधिकांश रास्तों को सुगम बनाने का कार्य पूरा हो चुका है।
माधव अकादमिक भवन में अधिकांश कक्षों को फैकल्टी के लिए तैयार किया जा चुका है। वहीं विश्वविद्यालय में विशाल कंप्यूटर लैब भी शुरू हो चुकी है, जिसमें कुल 100 कंप्यूटर लगाए जाने हैं। इसके अलावा महर्षि भृगु केंद्रीय पुस्तकालय के नए भवन की स्थापना का कार्य भी चल रहा है। प्रशासनिक भवन के अधिकांश कक्ष अलग-अलग कार्यों के लिए आवंटित किए जा चुके हैं।
बीसीए-बीबीए के बाद आगे की पढ़ाई का रास्ता होगा आसान
विश्वविद्यालय में संचालित बीसीए और बीबीए पाठ्यक्रमों के आगे की पढ़ाई के लिए इंटीग्रेटेड बीसीए प्लस एमसीए तथा इंटीग्रेटेड बीबीए प्लस एमबीए पाठ्यक्रम जल्द शुरू किए जाने की तैयारी है। इससे विद्यार्थियों को स्नातक के बाद उच्च शिक्षा के लिए दूसरे संस्थानों का रुख करने की जरूरत कम होगी।
विश्वविद्यालय का मुख्य प्रवेश द्वार भी आकर्षक ढंग से तैयार किया जा चुका है। इसका लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों कराने की तैयारी है।
पढ़ाई से लेकर परीक्षा और कृषि तक पहुंचेगा एआई
कुलपति प्रो. नरेंद्र कुमार शुक्ला ने समाचार बैंक के साथ विशेष बातचीत में बताया कि विश्वविद्यालय में एआई के इस्तेमाल को व्यापक स्तर पर बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने कहा कि पढ़ाई, परीक्षा और कृषि संकाय में एआई तकनीक का उपयोग किया जाएगा। उनकी मंशा विश्वविद्यालय को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए विद्यार्थियों को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप तैयार करने की है।
एशिया के सबसे बड़े फव्वारे को फिर शुरू कराने की कवायद
विश्वविद्यालय परिसर की पहचान से जुड़े एशिया के सबसे बड़े फव्वारे को जल्द शुरू कराने की कवायद भी शुरू कर दी गई है। कुलपति के अनुसार, किसी संस्था द्वारा फव्वारे को गोद लेकर उसका विकास और रखरखाव कराया जा सकता है।
कुलपति ने यह भी कहा कि जिले से संबंध रखने वाले एनआरआई यदि विश्वविद्यालय के विकास में सहयोग देना चाहें तो उनका स्वागत है। ऐसे सहयोग से विश्वविद्यालय में सुविधाओं और शैक्षणिक गतिविधियों को और गति दी जा सकती है।
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