जिला अस्पताल में विशेषज्ञ डॉक्टरों का अभाव, निजी अस्पतालों और क्लीनिकों पर स्वास्थ्य विभाग की निगरानी भी सवालों के घेरे में

जिले के अधिकांश सरकारी चिकित्सालयों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) की व्यवस्था नहीं है, जिससे अस्पतालों से निकलने वाले अपशिष्ट के सुरक्षित निस्तारण पर गंभीर प्रश्न खड़े हो रहे हैं। पर्यावरणीय मानकों के अनुसार अस्पतालों में अपशिष्ट और सीवेज के उचित प्रबंधन की व्यवस्था आवश्यक मानी जाती है।
वहीं, जिले के अनेक निजी चिकित्सालयों और क्लीनिकों में भी स्वास्थ्य विभाग की प्रभावी निगरानी नहीं दिखाई देती। आरोप है कि कई स्थानों पर नियमों की अनदेखी के बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही, जिससे स्वास्थ्य प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
इधर, जिला अस्पताल स्वयं विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी से जूझ रहा है। चर्म रोग (Skin) तथा ईएनटी (नाक, कान एवं गला) विशेषज्ञ/सर्जनों के पर्याप्त पद उपलब्ध न होने या रिक्त रहने से मरीजों को इलाज के लिए निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है। इससे गरीब और सामान्य मरीजों को आर्थिक एवं मानसिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

अब बड़ा सवाल यह है कि जब सरकारी अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएँ, विशेषज्ञ डॉक्टर और पर्यावरणीय मानकों का समुचित पालन सुनिश्चित नहीं हो पा रहा है, तो जिले की स्वास्थ्य व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए जिम्मेदार विभाग कब ठोस कदम उठाएगा?