पूरे ब्रह्मांड में रुद्राक्ष की उत्पत्ति भगवान शिव के आंसुओ से हुई थी। ऐसी मान्यता है कि जो भी इसे धारण करता है उस पर शिव की विशेष कृपा रहती है। लेकिन इसे धारण करने के कई नियम हैं जिसका अगर पालन न किया जाए तो काफी नुकसान भी हो सकता है। बहुत से लोग शौकिया तौर पर रुद्राक्ष पहन लेते हैं। जिसका नुकसान भी हो सकता है। इसलिए यह जानना बहुत जरूरी है कि रुद्राक्ष को पहनने से पहले हमें इसके बारे में कुछ जरूरी चीजों को जानना जरूरी होता है।
रुद्राक्ष को भगवान शिव का प्रसाद माना जाता है, जो एक चमत्कारी बीज भी है. रुद्राक्ष कई तरह के होते हैं और इन सभी का अलग-अलग देवी-देवताओं और मनोकामनाओं से संबंध होता है। एक मुखी रुद्राक्ष को साक्षात भगवान शिव का स्वरूप माना जाता है और कहा जाता है कि इसके धारण करने पर भोग और मोक्ष की प्राप्ति होती है। जबकि दो मुखी रुद्राक्ष को देव देवेश्वर कहा गया है. माना जाता है कि दो मुखी रुद्राक्ष सभी मनोकामनाओं को पूरा करने वाला होता है। तीन मुखी रुद्राक्ष को धारण करने से समस्त ज्ञान की प्राप्ति होती है जबकि चार मुखी रुद्राक्ष साक्षात् ब्रह्मा जी का स्वरूप माना गया है. कहते हैं कि चार मुखी रुद्राक्ष के दर्शन मात्र से ही धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। इसके अलावा पांच मुखी रुद्राक्ष को कालाग्नि रूद्र का स्वरूप माना जाता है.
छ: मुखी रुद्राक्ष कार्तिकेय का स्वरूप माना गया है। जिसके धारण से ब्रह्महत्या के पाप से भी मुक्ति मिल जाती है. सात मुखी रुद्राक्ष धन का स्वामी बना देता है और आठ मुखी रुद्राक्ष भैरव का स्वरूप माना जाता है. आठ मुखी रुद्राक्ष मनुष्य को पूर्णायु प्रदान करता है. नौ मुखी रुद्राक्ष कपिल-मुनि का स्वरूप है और दस मुखी रुद्राक्ष भगवान विष्णु का स्वरूप माना जाता है. धर्म से जुड़ी मान्यता के अनुसार अगर आप ग्यारह मुखी रुद्राक्ष धारण करें तो हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर सकते हैं. आइए, जानते हैं पवित्र रुद्राक्ष को पहनने के क्या नियम हैं.
धारण करने के नियम :
– रुद्राक्ष को कभी भी काले धागे में धारण न करें. इसे लाल, पीला या सफेद धागे में ही धारण करें.
– रुद्राक्ष को चांदी, सोना या तांबे में भी धारण किया जा सकता है.
– धारण करते समय ‘ॐ नम: शिवाय’ का जाप करें.
– रुद्राक्ष को पूरी पवित्रता के साथ पहनें.
– भूलकर भी दूसरे व्यक्ति को अपना रुद्राक्ष पहनने करने के लिए नहीं दें.
– रुद्राक्ष को हमेशा विषम संख्या में धारण करें.
– कभी भी 27 दानों से कम की रुद्राक्ष माला न धारण करें. ऐसा करने पर शिवदोष लगता है.
– 108 दानों की माला को धारण करने और उसे जप करने से साधक को विशेष लाभ की प्राप्ति होती है।
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