
बलिया: भृगुनगरी के आस्था के केंद्र, बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर के प्रबंधन को लेकर एक ऐतिहासिक कानूनी फैसला आया है। लंबे समय से चल रहे विवाद पर विराम लगाते हुए बलिया के अपर जिला जज (प्रथम) ने मंदिर की व्यवस्था पूरी तरह से जिला प्रशासन को सौंपने का आदेश दिया है।
क्या है कोर्ट का आदेश?
बलिया सिविल कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता रामजी तिवारी के अनुसार, न्यायालय ने मंदिर के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए निम्नलिखित कड़े कदम उठाए हैं:
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सिटी मजिस्ट्रेट की नियुक्ति: न्यायालय ने बलिया के सिटी मजिस्ट्रेट को मंदिर का रिसीवर (प्रबंधक) नियुक्त किया है।
खजाने पर सरकारी पहरा: मंदिर की दुकानों का किराया, दानपात्र की आय और अन्य स्रोतों से होने वाली पूरी कमाई अब सीधे प्रशासन के नियंत्रण में होगी।
3 महीने में देना होगा हिसाब: सिटी मजिस्ट्रेट को अगले तीन महीनों के भीतर मंदिर के आय-व्यय का पूरा ब्यौरा कोर्ट में पेश करना होगा। इसके लिए वे चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) की मदद भी ले सकते हैं।
क्यों छिड़ा था विवाद?
अधिवक्ता रामजी तिवारी ने बताया कि यह पूरा विवाद मंदिर पर काबिज एक ‘कथित कमेटी’ को लेकर था।
”यह कमेटी वास्तव में एक विद्यालय की थी, जिसने मंदिर के प्रबंधन पर अपना दावा ठोक रखा था। मंदिर के असली सेवायतों और पुजारियों ने इसके खिलाफ लंबी कानूनी लड़ाई लड़ी।”
यह मामला आजमगढ़ के चिट फंड कार्यालय से शुरू होकर कमिश्नरी और फिर माननीय उच्च न्यायालय तक पहुँचा। हाईकोर्ट के निर्देश पर बलिया की अदालत में सुनवाई हुई। अंततः, अपील संख्या 78/2016 (बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर बनाम उदयभान श्रीवास्तव व अन्य) पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने 23 अप्रैल, 2024 को पुरानी कमेटी को निरस्त कर दिया।
प्रशासन की ‘तालाबंदी’ और अगली कार्रवाई
कोर्ट के आदेश के बाद प्रशासनिक मशीनरी हरकत में आ गई है। अधिवक्ता ने बताया कि:
सिटी मजिस्ट्रेट ने मंदिर के वर्तमान प्रबंधकों को मौके पर उपस्थित रहने का निर्देश दिया है।
प्रशासन मंदिर के दानपात्रों और महत्वपूर्ण कक्षों (हॉल आदि) में अपना ताला लगाएगा ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
विपक्षी पक्ष, जिसमें अजय कुमार चौधरी (डब्लू) को रेस्पोंडेंट नंबर 16 बनाया गया था, अब प्रबंधन से बाहर हो चुके हैं।
निष्कर्ष: अब बाबा बालेश्वर नाथ मंदिर का संचालन पूरी तरह से कोर्ट के निर्देशों के तहत सिटी मजिस्ट्रेट के हाथों में होगा। श्रद्धालुओं में इस फैसले को लेकर काफी चर्चा है, क्योंकि अब मंदिर के चढ़ावे का उपयोग मंदिर के विकास और व्यवस्था सुधार के लिए होने की
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