
सपा के दिग्गज नेताओं में से एक व नेता प्रतिपक्ष के लिए बांसडीह विधानसभा की सीट होगी काँटों भरी सेज
बलिया। जिले से सात विस सीटों में सबसे महत्वपूर्ण सीट पर पर इस बार प्रत्याशी उतारने में भाजपा भी कोई जल्दबाजी नहीं दिख रही है। इस बार 2022 का चुनावी नैय्या लहर पर नहीं बल्कि उम्मीदवार के बल पर जितने के फिराक में है। भाजपा ने अपने सहयोगी दल निषाद पार्टी से केतकी सिंह को टिकट देकर अपना गठबंधन धर्म भी निभाने को कहा है। वहीं दूसरी ओर केतकी सिंह भी जीत को पाने के लिए उसी दल से उतरने में कामयाबी मान रही है। हालांकि एक सूची जारी होने के भी उनको टिकट पाने का भरोसा है। इस चुनाव में ये केन प्रकारेण सीट को गठबंधन हरण नहीं चाह रहा है। इस बार पार्टी के लोग पिछली बार की तरह से कोई गलती नहीं दोहराना चाहते है। ऐसे में माना यह जा रहा है कि इस बार बांसडीह विस लिए के लिए भाजपा नेतृत्व काफी संजीदगी दिखा रहा है। ऐसे में सपा के लिए बांसडीह विधानसभा में कड़ा मुकाबला होना तय है। कारण जनपद के लोग भी इस सीट को पक्की मान रहे है। उनके मुकाबले में सपा के कद्दावर नेता व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी भी काफी दमखम से चुनाव में लग चुके है। अब विधानसभा क्षेत्र की जनता क्या फैसला करेगी। यह तो 10 मार्च को ही पता चल पाएगा। लेकिन जनता को तो सिर्फ काम करने वाला नेताओं की जरूरत है। युवाओं को रोजगार का भरोसा दिलाने वाला नेता चाहिए। इस बार देश के युवा व बेरोजगारी से जूझ रहे लोगों को कौन सा दल संतुष्ट कर पाता है। इसपर विचार करना जरूरी हो गया है। वहीं इलाहाबाद में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं की पिटाई भी इस चुनाव में एक अहम मुद्दा रहेगा।

बांसडीह विस से भाजपा+निषाद पार्टी गठबंधन के प्रत्यासी केतकी सिंह के सामने आने से सपा विधायक नेता प्रतिपक्ष के किले को भेद पाना चुनौतीपूर्ण है। 2017 विधानसभा में राजभर समीकरण के चलते टिकट कट जाने के बाद निर्दल लड़ी केतकी सिंह को 1687 वोटों से हार का सामना करना पड़ा था। उस समय केतकी सिंह को 49514 वोट मिले थे। वही भजपा+सुभासपा गठबंधन के प्रत्यासी अरविंद राजभर को 40234 वोट मिले थे, तो बसपा प्रत्यासी शिवशंकर चौहान को 38745 वोट मिले थे। विजेता सपा विधायक को 51201 वोट मिले थे। इस बार केतकी को टिकट मिलने के बाद बांसडीह से निषाद पार्टी के सहयोग से कमल खिलने के कयास लगाए जा रहे है । लेकिन बसपा से लोगों के मोह भंग हो जाने और सपा+सुभासपा का गठबंधन के कारण केतकी की नैया पार होना आसान नहीं लग रहा है। क्योंकि पिछली बार सुभासपा प्रत्यासी प्रत्यासी के मिले वोट के आधे वोट भी अगर सपा के पक्ष में गया तो केतकी को मेहनत ज्यादा करनी पड़ेगी। वैसे तो वर्तमान विधायक से जनता की नराजगी, योगी+मोदी फैक्टर और गठबंधन में भाग्य किसका साथ देती है। ये तो आगामी 10 मार्च को ही पता चल पायेगा।
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