बलिया। बलिया हिंदी प्रचारिणी सभा के चलता पुस्तकालय के सभागार में कोविड-19 पालन करते हुए जनपद के प्रख्यात साहित्यकार, पत्रकार स्वतंत्रता सेनानी बाबू काशी प्रसाद उन्मेष की 103 वी जयंती मनाई गई। जिसमें वक्ताओं ने उनके जीवन के एक एक क्षण को याद करते हुए प्रकाश डाला। कार्यक्रम का शुभारंभ उनके चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके उपरांत काव्यगोष्ठी की शुरुआत शिवजी पांडेय रसराज की वाणी वंदना से हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए अध्यक्षता कर रहे हैं महर्षि अशोक ने कहा कि उन्मेष जी एक संघर्षशील व्यक्ति थे। वे सबको लेकर चलने में विश्वास रखते थे। वे स्वयं एक संस्था थे और जागरूक पत्रकार तो थे ही अखंड कवि थे। रंगकर्मी आशीष त्रिवेदी ने कहा कि उन्मेष क समाचार पत्र के संपादक थे। कलाकार रंगकर्मी एवं प्रगतिवादी विचारधारा के पोषक थे। राज गुप्त ने कहा कि उन्मेष जी एक परंपरागत जीवन शैली के प्रतीक थे। छोटे जाति का सम्मान करना उनका स्वभाव था। विजय मिश्र ने कहा कि उन्मेष जी स्पष्ट वक्ता थे निर्भीक पत्रकार थे। उनका जीवन सरल एवं पारदर्शी था। डॉ राजेंद्र भारती ने कहा कि  जी कहते थे कि संगीत से पर्यावरण शुद्ध होता है धूमिल जी उनके कार्यालय पर आते थे और कहते थे कि मैं इनसे सीखता हूँ। डॉ. रघुवंश मणि पाठक ने अपने संदेश में कहा कि उन्मेष जी एक निर्भीक संपादक संवाहक और स्वतंत्रता सेनानी थे। हिंदी प्रचारिणी सभा के अध्यक्ष के रूप में जो कार्य उन्होंने किया वह विलक्षण था। जनपद का गौरव सम्मान समारोह डॉ. शत्रुघन पांडे ने अपने संदेश में कहा कि उन्मेष जी विद्वानों का बहुत आदर करते थे। गोष्ठी में डॉ. कादंबनी सिंह, शिवजी पांडेय रसराज, भोला प्रसाद आग्नेय, हरेराम, धर्मराज गुप्त आदि ने काव्य पाठ किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता महर्षि अशोक व संचालन डॉ राजेंद्र भारती ने की तथा मंत्री शिवजी पांडेय रसराज ने सभी के प्रति आभार प्रकट किया।