विवादित मामलों के बीच थाने की जिम्मेदारी से हटाए जाने पर उठे सवाल, आगे की विभागीय कार्रवाई पर नजर
बलिया। रसड़ा कोतवाली में तैनात इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह को थाने की जिम्मेदारी से हटा दिया गया है। उन्हें अब साइबर सेल से संबद्ध किया गया है। पुलिस विभाग के इस फेरबदल के बाद रसड़ा कोतवाली में उनके कार्यकाल के दौरान सामने आए विवादित मामलों को लेकर एक बार फिर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह के कार्यकाल में सोशल मीडिया रील से जुड़े विवाद, बैजलपुर की घटना और एक ट्रक को कथित तौर पर गलत तरीके से ब्लैकलिस्ट किए जाने का मामला चर्चा में रहा। इन मामलों को लेकर पुलिस की कार्यप्रणाली और विवेचना को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
अब विभाग की ओर से उन्हें रसड़ा कोतवाली से हटाकर साइबर सेल से संबद्ध किए जाने के बाद यह सवाल भी सामने आया है कि यह कार्रवाई सामान्य प्रशासनिक फेरबदल है या विवादित मामलों के बीच उठाया गया विभागीय कदम। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर इसे दंडात्मक कार्रवाई मानना अभी जल्दबाजी होगी। पुलिस विभाग की ओर से कार्रवाई के कारणों को लेकर विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने आना बाकी है।
हाईकोर्ट संदर्भ के बाद बढ़ी निगाहें
इन मामलों में हाईकोर्ट स्तर पर कार्रवाई का संदर्भ सामने आने के बाद अब विभागीय जांच और उसके निष्कर्ष महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। ऐसे में इंस्पेक्टर की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की जांच किस स्तर तक पहुंचती है और उसके आधार पर विभाग आगे क्या कदम उठाता है, इस पर निगाहें टिकी हैं।
फिलहाल इंस्पेक्टर योगेंद्र बहादुर सिंह रसड़ा कोतवाली की जिम्मेदारी से मुक्त होकर साइबर सेल से संबद्ध हो गए हैं। थाने की जिम्मेदारी में बदलाव के बाद अब यह भी देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित मामलों की जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है और विभाग की ओर से भविष्य में कोई अतिरिक्त कार्रवाई की जाती है या नहीं।
समाचार बैंक की नजर: किसी पुलिस अधिकारी के स्थानांतरण या अटैचमेंट को अपने आप में दोष सिद्ध होने का प्रमाण नहीं माना जा सकता। संबंधित मामलों में अंतिम निष्कर्ष सक्षम जांच अथवा न्यायिक प्रक्रिया के आधार पर ही तय होगा।
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