बलिया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता, पूर्व मंत्री और उत्तर प्रदेश विधानसभा के पूर्व नेता प्रतिपक्ष रामगोविंद चौधरी का शुक्रवार, 25 सितंबर की रात लखनऊ स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) में उपचार के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की खबर से बलिया समेत पूरे प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई।
रामगोविंद चौधरी बलिया की राजनीति के प्रमुख चेहरों में रहे। वह चिलकहर और बांसडीह विधानसभा क्षेत्रों से कुल आठ बार विधायक चुने गए। वर्ष 2017 से 2022 तक उन्होंने उत्तर प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी संभाली।
उनका राजनीतिक सफर छात्र राजनीति से शुरू हुआ। बलिया के टाउन डिग्री कॉलेज में छात्र राजनीति से सक्रिय हुए रामगोविंद चौधरी आगे चलकर समाजवादी आंदोलन से जुड़े और लंबे समय तक प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे। आपातकाल के दौरान भी उन्होंने लोकतांत्रिक अधिकारों के आंदोलन में भाग लिया और जेल गए।
वर्ष 1977 में उन्होंने चिलकहर विधानसभा क्षेत्र से पहली बार चुनाव जीता। इसके बाद कई चुनावों में जीत दर्ज करते हुए वह विधानसभा पहुंचे। बाद में बांसडीह विधानसभा क्षेत्र उनकी राजनीतिक कर्मभूमि बना। विधानसभा में उनके कुल आठ कार्यकाल दर्ज हैं।
रामगोविंद चौधरी ने प्रदेश सरकार में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभालीं। उन्होंने मुलायम सिंह यादव की सरकारों में मंत्री के रूप में कार्य किया और वर्ष 2012 से 2017 तक अखिलेश यादव सरकार में भी मंत्री रहे। इसके बाद 2017 से 2022 तक वह विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष रहे।
उनके निधन पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव समेत विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं ने शोक व्यक्त किया। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी रामगोविंद चौधरी के निधन पर दु:ख जताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की।
रामगोविंद चौधरी के निधन से बलिया ने अपने लंबे समय तक सक्रिय रहे एक प्रमुख राजनीतिक प्रतिनिधि को खो दिया है। उनके निधन की खबर के बाद समर्थकों, पार्टी कार्यकर्ताओं और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं में शोक व्याप्त है।
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