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अस्पतालों में एनजीटी के मानकों को खुलेआम ठेंगा, प्रदूषण महकमे के अफसरों ने बंद किए आँख


बलिया : जिला अस्पताल तथा महिला अस्पताल के अलावे जिले के समस्त सीएचसी/पीएचसी एनजीटी के मानकों कों खुलेआम ठेंगा दिखा रहे है। जिला मुख्यालय पर संचालित होने वाले सरकारी बेडेड अस्पतालों में न तो एसटीपी है और न तो इटीपी लगा है। प्रदूषण मानकों की घोर अनदेखी के बावजूद भी इस तरफ उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अफसरों की उदासीनता साफ दिख रही है। जबकि प्राइवेट अस्पतालों को एसटीपी(सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट)/इटीपी लगे होने के बावजूद उनसे गलत तरीके से आज़मगढ़ बुलाकर मानकों की घुट्टी पिलाने के बाद उनका दोहन करने से बाज़ नहीं आ रहे। ऐसे में सिर्फ निजी अस्पतालों को ही मोहरा बनाया जा रहा है।


प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दोहरे कार्यशैली से निजी नर्सिंग होम संचालकों में काफी नाराजगी है। वहीं प्रदूषण बोर्ड के अफसरों की कार्यशैली से भी लोगों का भरोसा उठने लगा है। लोगों का कहना है कि अगर एनजीटी ने मानक तय किया है तो उसका पालन बोर्ड के अफसरों कों सरकार के अस्पतालों से भी कराना होगा।

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बताते चलें है कि अस्पताल एनजीटी ( नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) के प्रदूषण मानकों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिससे गंभीर पर्यावरण और स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो रही हैं, और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारी इन उल्लंघनों पर आँखें मूंदे हुए हैं, जो भ्रष्टाचार और निष्क्रियता की ओर इशारा करता है, जबकि एनजीटी जैसे निकाय सख्त नियमों और निगरानी के लिए मौजूद हैं, पर ज़मीनी हकीकत अलग है। 

समस्या की जड़:

  • अस्पताल प्रदूषण: अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल कचरे, खतरनाक रसायनों और वायु उत्सर्जन को सही तरीके से प्रबंधित नहीं किया जाता, जिससे हवा, पानी और मिट्टी प्रदूषित होती है।
  • एनजीटी मानक: एनजीटी ने अस्पतालों के लिए सख्त नियम बनाए हैं, जैसे कचरे का उचित निपटान, उत्सर्जन नियंत्रण और बायोमेडिकल कचरे के प्रबंधन के लिए बायोमेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का पालन।
  • अधिकारियों की निष्क्रियता: प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (PCB) के अधिकारी निरीक्षण नहीं करते या मिलीभगत करके उल्लंघनों को नज़रअंदाज़ करते हैं, जिससे अस्पतालों को नियमों का उल्लंघन करने की छूट मिलती है। 

प्रभाव:

  • स्वास्थ्य पर खतरा: दूषित हवा और पानी से अस्थमा, सीओपीडी जैसी बीमारियाँ और बच्चों में मृत्यु दर बढ़ सकती है।
  • पर्यावरण का नुकसान: मिट्टी और जल स्रोतों में खतरनाक रसायन मिलकर इकोसिस्टम को नुकसान पहुँचाते हैं। 

क्या होना चाहिए एनजीटी का रुख

  • एनजीटी इन मामलों में स्वतः संज्ञान लेकर या जनहित याचिकाओं (PILs) पर कार्रवाई करता है और संबंधित विभागों को नोटिस जारी कर जवाब तलब करता है।
  • यह बोर्डों को रिपोर्ट देने और नियमों के पालन की स्थिति बताने का आदेश देता है। 

संक्षेप में: यह शीर्षक अस्पताल क्षेत्र में व्याप्त प्रदूषण, नियमों की अनदेखी और संबंधित अधिकारियों की विफलता को उजागर करता है, जिसके खिलाफ एनजीटी जैसे मंचों पर आवाज उठाई जाती है। 


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Pradeep Gupta
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