...और नहीं मिले दलाली में लिप्त अधिकारी, कर्मचारी व दलाल
अधिवक्ताओं ने अनर्गल रूप से टैक्स लगाने की डीएम से की शिकायत
बलिया। गुरुवार को जिलाधिकारी प्रवीण कुमार लक्षकार ने इंदिरा मार्केट स्थित सेल टैक्स विभाग में औचक छापेमारी की। यह तो संयोग ही था कि कोई भी दलाल या संलिप्त अधिकारी व कर्मचारी पकड़ में नहीं आया। छापेमारी के दौरान की जीएसटी ऑफिस में हड़कंप स्थिति बनी रही। इस दौरान सेल टैक्स के अधिवक्ताओं ने गुड्स एवं सर्विस टैक्स विभाग के आला अधिकारियों के प्रति रोष जताते हुए अनर्गल रूप से टैक्स लगाने की धमकी देते हुए अवैध वसूली का आरोप लगाया। डीएम ने साइबर कैफे व अन्य माध्यम के दलालों के बारे वहाँ मौजूद अधिवक्ता बंधुओ से सूची भी मांगी.

सूबे की योगी सरकार के छापेमारी अभियान से हर कोई खुश है. उनके सख्त रवैये के चलते प्रत्येक कार्यालय में संलिप्त अधिकारी व कर्मचारियों के साथ ही दलालों की छापेमारी कर धड़ पकड़ की जा रही है। बावजूद दलाली है की रुकने का नाम नहीं लेकिन रहीं है. जबकि सच्चाई यह है की प्रदेश सरकार के आला अफसरों की डाल रोटी भी इन्हीं दलालों के माध्यम से कट रहीं है.

बता दे कि यूपी बिहार के नरही थाना अंतर्गत भरौली गोलंबर पर 24 जुलाई की रात एडीजी वाराणसी पीयूष मोर्डिया एवं डीआईजी आजमगढ़ वैभव कृष्ण ने छापेमारी कर अवैध वसूली का भंडाफोड़ किया था। वहीं 25 जुलाई को मुख्य विकास अधिकारी ओजस्वी राज ने सिटी मजिस्ट्रेट व सीओ सिटी के साथ एआरटीओ कार्यालय पर छापेमारी की थी। जिसमें तीन से चार दलालों को हिरासत में लिया गया था। इसी क्रम में जिलाधिकारी ने गुरुवार को इंदिरा मार्केट स्थित गुड्स एवं सर्विस टैक्स विभाग में औचक छापेमारी की। संयोग ही अच्छा रहा की कोई दलाल, संलिप्त अधिकारी, कर्मचारी डीएम साहब कि पकड़ में नहीं आए.

इस दौरान जिलाधिकारी ने पूछा अधिकारियों के साथ कौन-कौन दलाल संलिप्त है, और कौन-कौन अधिकारी व स्टेनो दलालों के संपर्क में है उसकी सूची मांगी है। वास्तव में डीएम साहब को किसी ने बता दिया कि दलालों के माध्यम से यूपी के ऑफिसों में काम होता है. लेकिन आज भी उन्हें नहीं मालूम कि दलाली व घूस का तरीका पूरी तरह से डिजिटल हो चुका है. जिन्हे वे चाहकर नहीं रोक पाएंगे. अगर सरकार वास्तव दलालों को रोकना चाहती है. आला अफसरों से भी चंदा लेना बंद करना होगा.