मनगढ़ंत रिपोर्ट के सहारे प्रतिदिन हजारों कुंतल धान की खरीददारी कागजों पर


बेरुआरबारी(बलिया) आज क्षेत्र के किसान अपने धान की फसल बेचने के लिए दरदर की ठोकरे खाने को विवश हैं । किसान क्रय केंद्रों पर अपनी ट्रेक्टर ट्राली से गोदाम पर ले जाकर कई दिनों से लेकर खड़े हैं । जब कि क्रय केंद्र बोरे के अभाव में बंद पड़ा है । जब कि प्रशासन अपनी झूठी और मनगढ़ंत रिपोर्ट के सहारे प्रतिदिन हजारों कुंतल धान की खरीददारी कागजों पर कर रहा है । कहा जा रहा है कि प्रशासन ही विचैलियें को बढ़ावा देकर उन्हीं से धान खरीद कर अपने लक्ष्य को पूरा कर रहा है जबकि किसान सरकार द्वारा जारी किए गए गाइडलाइन का पालन कर मारा मारा फिर रहा है । बताया जा रहा है कि अक्टूबर महीने से ही सरकार ने गाजे बाजे के साथ बहुप्रचारित धान की खरीददारी विभिन्न क्रय केन्द्रों के माध्यम से कर रही है लेकिन क्षेत्र में 15 नवंबर के बाद धान की खरीददारी शुरू हुई जो संसाधन के अभाव में एक दो दिन बाद ही प्रशासनिक दुर्व्यवस्था का शिकार हो गयी और धान की खरीददारी दलालों के इर्द-गिर्द गिर्द घूमने लगी परिणाम यह हुआ कि सरकार द्वारा किसानों के धान का समर्थन मूल्य 72 घंटे में किसानों के खाते भेजने की घोषणा सिर्फ हवा हवाई साबित हुई और किसान अपने धान को 1200 रूपये प्रति कुंतल बेचने को मजबूर हो गए । साधन सहकारी समिति बेरुआरबारी केन्द्र प्रभारी गोरख यादव ने बताया की अब तक 4205 कुन्तल धान की खरीदारी हुआ हैं । अभी बोरे के अभाव में खरीदारी नही हो पा रही हैं क्षेत्र के जयप्रकाश सिंह,अनूप कुमार सिंह, अजय सिंह,जय प्रकाश वर्मा आदि किसानों का आरोप है कि प्रशासन द्वारा यह कृत्रिम संकट जानबूझकर दलालों के वर्चस्व को बनाये रखने के लिए किया जा रहा है । दलालों से मोटी रकम लेकर उनसे खरीददारी कर प्रशासन कागजों में अपना लक्ष्य तो पूरा कर ले रहा है परंतु किसान लागत से दोगुना कौन कहे कई गुना नीचे दाम पर बेचने को मजबूर हो रहा है । किसानों का आरोप है कि सरकार स्वयं नहीं चाहती कि किसानों के अनाज क्रय केन्द्रों के माध्यम से खरीदें जाय जिससे खेती घाटे का सेक्टर हो और किसानों के खेतों पर दलाल पूंजीपतियों का कब्जा हो जाय ।