नईदिल्ली/ बलिया : 78वें स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर भारत सरकार द्वारा दिल्ली स्थित ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह में बलिया जिले के युवा लेखक धर्मराज गुप्ता को विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया गया है। यह आमंत्रण भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय एवं रक्षा मंत्रालय के तहत प्रधानमंत्री युवा लेखक योजना के अंतर्गत चयनित लेखकों को मिला है।
धर्मराज गुप्ता, बलिया जनपद के मनियर ब्लॉक अंतर्गत ग्राम चोरकैन्ड-मल्हौवाँ के निवासी हैं। वे बताते हैं कि उन्हें प्रारंभ से ही इतिहास के तथ्यों को जानने की जिज्ञासा रही है। बलिया निवासी होने के कारण उन्होंने बचपन से ही बलिया की अगस्त क्रांति के किस्सों को सुनते आ रहे थे। इस जिज्ञासा को संतुष्ट करने हेतु उन्होंने इससे संबंधित कई पुस्तकों का अध्ययन किया, जिससे ऐतिहासिक तथ्यों की परतें उनके समक्ष स्पष्ट हुईं।
वर्ष 2021 में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की गई प्रधानमंत्री युवा लेखक योजना के तहत देशभर में आयोजित अखिल भारतीय प्रतियोगिता के माध्यम से 75 युवा लेखकों का चयन किया गया था, जो भारत के वैचारिक प्रतिनिधि के रूप में उभर सकें। धर्मराज गुप्ता ने इस प्रतिष्ठित योजना में चयनित होकर बलिया का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन किया।
इस योजना के नेतृत्व संस्था नेशनल बुक ट्रस्ट के सहयोग से उनकी पुस्तक "याद करूं तो…1942 बलिया की क्रांति" वर्ष 2023 में विश्व पुस्तक मेला में प्रकाशित हुई, जिसे न केवल भारत, बल्कि विश्व के अनेक देशों के पुस्तक मेलों में भी प्रदर्शित किया गया।
लेखक ने लेखन के दौरान देश के विभिन्न प्रतिष्ठित पुस्तकालयों—जैसे नेशनल लाइब्रेरी (कोलकाता), एशियाटिक सोसाइटी (कोलकाता), बनारस हिंदू विश्वविद्यालय आदि—में जाकर शोध किया और बलिया के इतिहास से जुड़े कई महत्वपूर्ण तथ्यों को गहराई से संकलित किया।
गत वर्ष राष्ट्रपति भवन में उन्हें राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू द्वारा भी आमंत्रित किया गया था। उन्होंने बलिया की क्रांति गाथा को सुनकर गहरा आश्चर्य प्रकट किया और इस पुस्तक को पढ़ने की इच्छा भी जताई।
इस आमंत्रण से प्रसन्न होकर लेखक धर्मराज गुप्ता ने इसका श्रेय अपनी माता श्रीमती उर्मिला देवी, पिता श्री कन्हैया प्रसाद, बड़े भाइयों सत्य प्रकाश एवं सूरज गुप्ता, बहनों गंगोत्री व सावित्री तथा मार्गदर्शक अशोक पत्रकार को दिया। इसके अतिरिक्त लेखन यात्रा में सहयोग देने वाले श्री शशिप्रेम देव, उमेश चतुर्वेदी, अरुण सिंह, रियाजउद्दीन अंसारी, शिवजी पांडेय, मोहन श्रीवास्तव एवं आशीष त्रिवेदी के प्रति भी उन्होंने आभार प्रकट किया।
इस उपलब्धि की खबर मिलते ही जनार्दन चतुर्वेदी, राजेंद्र भारती, कमलेश श्रीवास्तव, डॉ. कादम्बिनी सिंह, नवचंद तिवारी, रामावतार ओझा सहित बलिया के अनेक वरिष्ठ साहित्यकारों एवं सांस्कृतिकजनों में हर्ष की लहर दौड़ गई है।
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