जल निगम के एमडी ने जेएमडी को बनाया जांच अधिकारी
बलिया। बलिया जल निगम ग्रामीण में करोड़ों की हुई गड़बड़ी में अब मुख्य अभियंता वाराणसी विशेश्वर प्रसाद भी फंसे गए हैं। जल निगम के अध्यक्ष अनुराग श्रीवास्तव ने प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर विभागीय जांच के आदेश दिए हैं। जल निगम के प्रबंध निदेशक डॉ० राजशेखर ने बतौर जांच अधिकारी राजेश कुमार प्रजापति, संयुक्त प्रबन्ध निदेशक (प्रशासन), जल निगम (ग्रामीण), लखनऊ को नामित किया है। इस मामले में पहले से ही वर्तमान एक्सईएन मुकीम अहमद समेत चार अधिशासी अभियंता व तीन लेखाकार के खिलाफ जांच चल रही है। इसको लेकर विभाग में खलबली मचा हुआ है।
यह है आरोप
जल निगम ग्रामीण वाराणसी के मुख्य अभियन्ता द्वारा बलिया के मूनछपरा पेयजल योजना पर प्राप्त दो निविदाओं में वित्तीय प्रस्ताव खोलने हेतु अर्ह एक निविदाता की दरें स्वीकृत कर निविदा प्रक्रिया का उल्लंघन करने, सिवानकलां पेयजल योजना के निर्माण हेतु प्रथम न्यूनतम निविदादाता (21%) द्वारा अनुबन्ध गठित न कराये जाने पर निविदा समिति द्वारा द्वितीय निविदादाता 0.02% की दरें स्वीकृत करने के कारण विभाग को 7470757.07 रुपये की धनराशि एवं शिवरामपुर पेयजल योजना के निर्माण हेतु प्रथम न्यूनतम निविदादाता (22%) द्वारा अनुबन्ध गठित न कराये जाने पर निविदा समिति द्वारा द्वितीय निविदादाता (12.90%) की दरें स्वीकृत करने के कारण विभाग को 1699881.92 रुपये की वित्तीय हानि कारित करने का काम किया गया है। इसके अलावा जनपद-बलिया की 8 पेयजल योजनाओं कमशः सकरपुरा (20.25%), सरयां (60.19%), बहादुरपुर (43.23%), मिठवार (31.56%), कपुरी (41.34%), शंकरपुर (48.77%). टीका देउरी (60.00%) एवं नागपुर (17.90%) का वैरिएशन शासनादेश / वित्तीय नियमों के विरूद्ध अनियमित रूप से स्वीकृत करने, वित्तीय अनियमितता करने एवं विभाग को वित्तीय क्षति पहुँचाने, विभाग की छवि धूमिल करने, कर्तव्यों एवं दायित्वों के निर्वहन मे उदासीनता बरतने तथा कर्मचारी आचरण नियमावली प्राविधानों का उल्लंघन करने आदि से सम्बन्धित प्रतिकूल तथ्यों के प्रथम दृष्टया प्रकाश में आने एवं दोषी पाये जाने के फलस्वरूप विशेश्वर प्रसाद, मुख्य अभियन्ता के विरूद्ध विभागीय अनुशासनिक जांच संस्थित करते हुए आरोपों की जांच हेतु राजेश कुमार प्रजापति, संयुक्त प्रबन्ध निदेशक (प्रशासन), जल निगम (ग्रामीण), लखनऊ को पदेन जांच अधिकारी नामित किया जाता है।
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