
देश की राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू से प्राप्त किया संगीत नाटक अकादमी रत्न' अवार्ड
बलिया: बागी धरती की यशस्वी बेटी विदुषी श्रीमती डॉ शैलेश श्रीवास्तव को देश का सर्वोच्च संगीत क्षेत्र का सम्मान 'संगीत नाटक अकादमी रत्न' अवार्ड प्राप्त होने पर जिले के साथ बलिया कि माटी से जुड़े साहित्य एवं नाट्य प्रेमियों में बहुत ही हर्ष व्याप्त है। बलिया कि इस महान सम्मान पाने वाली बेटी को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने नवाजा है. बलिया का सर गौरव से ऊँचा करने वाली बेटी को बधाई देने वालों का ताँता लगा हुआ है.

दिल्ली के विज्ञान भवन में महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संध्याकाल में उत्तर प्रदेश के लोक संगीत में अद्वितीय उपलब्धियों के लिए वर्ष 2022 - 23 के इस सम्मान से अलंकृत किया। 65 वर्षीय शैलेश अपने अध्ययन काल में बलिया के विभिन्न विद्यालयों से सात स्वर्ण पदक हासिल किया।
उन्होंने टाउन कॉलेज के संगीत विभागाध्यक्ष डॉ काशी प्रसाद मिश्र और प्रोफेसर नरेंद्र कुमार शर्मा से संगीत की शिक्षा ग्रहण की, तदोपरान्त पण्डित राजन मिश्र व साजन मिश्र से संगीत की बारीकियों का अध्ययन और अभ्यास किया। सतीश चंद्र कॉलेज से राजनीति शास्त्र में स्वर्ण पदक के साथ एम. ए. करने के पश्चात अपने पिता प्रख्यात साहित्यकार लल्लन बी. ए. के साथ सपरिवार दिल्ली चली गईं। बलिया में रहते हुए ही उन्होंने भोजपुरी लोकगीतों के गायन में आकाशवाणी के गोरखपुर केन्द्र के माध्यम से ख्याति अर्जित कर ली थी और भोजपुरी गीतकार के रूप में कवि सम्मेलनों की शोभा वृद्धि करती रही थीं।
डॉ शैलेश इंडियन ब्रॉडकास्टिंग सर्विस में चयनित हुयीं और दूरदर्शन के मुम्बई केन्द्र से उच्चाधिकारी पद से सेवानिवृत्त हुईं। दूरदर्शन के लोकप्रिय कार्यक्रम रंगोली की दशकों तक सम्पादन और प्रस्तुति करती रहीं, इन्हें केंद्रीय प्रेस एक्सीलेंसी अवार्ड उत्तर प्रदेश की संगीत नाटक अकादमी अवार्ड, विसमिल्ला खां अवार्ड के अतिरिक्त अनेक पुरस्कार और सम्मान पहले मिल चुका है।
उन्होंने कई यूरोपीय देशों में भारतीय संगीत और उसकी लोकविधा में मंचीय प्रस्तुति करती रहीं। भोजपुरी के संस्कार गीत और मीडिया शोध प्रबन्ध पर मुम्बई विश्वविद्यालय से पी. एच. डी. की उपाधि शैलेश श्रीवास्तव को प्राप्त हुई जिसमें उन्होंने उन गीतों को स्वयं गाकर उसकी सी. डी. भी साथ में प्रस्तुत की। इन उपलब्धियों को याद करते हुए अशोक, डॉ जनार्दन राय, यशवंत सिंह, डॉ राजेंद्र भारती, शिव जी पाण्डेय 'रसराज', विवेकानंद सिंह, शशि प्रेमदेव, मोहन जी श्रीवास्तव, डॉ कादम्बिनी सिंह, आशीष त्रिवेदी, धर्मराज, ओमप्रकाश, ने हर्ष व्यक्त किया।
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