
वरिष्ठ अधिवक्ता स्व. हरेराम मिश्र के तैलचित्र का अनावरण
बलिया: क्रिमिनल एंड रेवेन्यू बार एसोसिएशन के सभागार में मंगलवार को वरिष्ठ अधिवक्ता स्व. हरेराम मिश्र के तेलचित्र का अनावरण समारोह आयोजित किया गया. जिसमें आए वक्ताओं ने वरिष्ठ अधिवक्ता स्व. मिश्रा के व्यक्तित्व व कृतित्व पर विस्तार से प्रकाश डाला. स्व. मिश्र के जीवन शैली को अपने जिंदगी में उतारने पर बल दिया.

इस मौके पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि जिला जज अशोक कुमार सप्तम ने कहा कि इस कार्यक्रम में आने के बाद ऐसा प्रतीत हो रहा है कि स्व. हरेराम मिश्र एक उम्दा किस्म के अधिक वरिष्ठ अधिवक्ता रहे होंगे. जिनके कार्यक्रम में मुझे आने का सौभाग्य मिला है. उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम में बुलाने के लिए क्रिमिनल बार के पदाधिकारियों के प्रति में कृतज्ञ हूं. जिन्होंने एक किसान परिवार में जन्मे श्री स्व. मिश्र के चित्र के अनावरण समारोह में हमें आमंत्रित किया.

इस मौके पर आयोजित सभा को संबोधित करते हुए प्रदेश सरकार के दर्जा प्राप्त मंत्री वाल्मीकि त्रिपाठी ने कहा कि मैं स्व. हरेराम मिश्र को बहुत ही नजदीक से और ठीक से जानता पहचानता हूं. जो गांव की पगडंडियों से वकालत की पढ़ाई पूरी करने के बाद वे इस मुकाम पर पहुंचे थे. उन्हें सभी लोग आदर और सम्मान के साथ बुलाते थे. उन्होंने अपने जीवन काल में जो अधिवक्ता हितों के लिए कार्य किया उसे भूलाया नहीं जा सकता.

इस मौके पर अपर जिला जज तृतीय मो. हुसैन अंसारी ने कहा कि मैं सूरज हूं, डूब भी गया तो अपनी चमक छोड़ जाऊंगा....। कहा कि स्व. मिश्रा गांव में पैदा होने के बाद तमाम दुश्वारियां का सामना किया होगा. जैसा की अधिवक्ता साथियों ने बताया उन्होंने कहा कि इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि वह किस तरह की अधिवक्ता थे उनके कार्यक्रम में उनकी पूरी कहानी उपस्थित अधिवक्ताओं की भीड़ ही बता रही है.

बार काउंसिल आफ यूपी के पूर्व उपाध्यक्ष एवं वर्तमान सचिव सदस्य जयनारायण पांडेय ने कहा की वकालत की स्कूल थे स्व. हरेराम मिश्र. उन्होंने अपने जीवन काल में जो शिक्षा हम अधिवक्ताओं को दी है. उसे हम कभी भी भूल नहीं सकते है. इस मौके पर बर काउंसिल के पूर्व अध्यक्ष अरुण कुमार त्रिपाठी ने कहा कि जहां अधिवक्ता एक कर्मयोगी होता है वही अपने वकालत के बदौलत इस कर्मस्थली पर महान कर्मयोगी बनकर स्व. मिश्रा ने दिखाया था.कहा कि अधिवक्ताओं में न्याय दिलाने की दिशा जिजीविषा होनी चाहिए.

क्रिमिनल बार के अध्यक्ष देवेंद्र नाथ मिश्र ने कहा कि अधिवक्ता और न्यायाधीश एक दूसरे के पूरक हैं. हर केस में अधिवक्ता अपनी बातों को रखता है. मेरिट के आधार पर उसे जीत या हार मिलती है. उसकी चिंता नहीं करके अपने वकालत पर ध्यान देने की जरुरत है. इस मौके पर अन्य वक्ताओं ने भी अपने विचार रखें. कार्यक्रम में मुख्य रूप से वरिष्ठ उपाध्यक्ष शिवकुमार तिवारी, अभिषेक कुमार मिश्रा, महासचिव अनिल मिश्र, अनिल कुमार सिंह, विवेकानंद पांडेय, श्रीराम सिंह, पंकज गुप्ता, वरुण पांडेय, कोषाध्यक्ष प्रदीप कुमार गुप्ता, कन्हैया तिवारी, विजय शंकर गुप्ता, संतोष सिंह, उमाशंकर तिवारी, मृत्युंजय कुमार सिंह, अनिलेश कुमार पाठक, कौशल कुमार सिंह, राजेंद्र त्रिपाठी, हंसराज तिवारी, अनिल राय, सुजाता, हिमांशु गुप्ता, अशोक वर्मा, परमात्मा नंद मिश्र, शंभूनाथ उपाध्याय, अजीत कुमार पांडेय, सिद्धार्थ दुबे, पंकज गुप्त, श्री शंकर राम फौदार आदि मौजूद रहे.