सिविल कोर्ट के बाहर ट्रैफिक पुलिस का खेल, नियमों की जगह ‘हाथ देकर पास’ कराने पर जोर
रॉन्ग साइड की फोटो खींचने में व्यस्त ट्रैफिक पुलिस, कोर्ट से निकलते वाहनों को ‘हाथ देकर’ रास्ता
नियम पालन कराने के बजाय गुफ्तगू और रॉन्ग साइड की फोटो तक सिमटी ड्यूटी?
बलिया। सिविल कोर्ट के सामने यातायात व्यवस्था संभालने के लिए तैनात पुलिसकर्मियों की कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात जवान यातायात नियमों का पालन कराने के बजाय आपस में बातचीत करने और रॉन्ग साइड से गुजरने वाले वाहनों की फोटो खींचने में अधिक व्यस्त नजर आते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि कोर्ट से निकलने वाले वाहनों को यातायात पुलिसकर्मी खुद हाथ देकर रास्ता देते हैं। रोडवेज की बसों को भी कथित तौर पर इसी तरह आगे बढ़ाया जाता है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या ट्रैफिक पुलिस का काम सिर्फ रॉन्ग साइड की फोटो खींचना है या सड़क पर नियमों का वास्तविक पालन कराना भी?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नियम तोड़ने वाले वाहन सामने से गुजर रहे हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं होती? केवल फोटो खींचने से यातायात व्यवस्था कैसे सुधरेगी?
सवाल पुलिसिंग पर है—जब नियम लागू कराने वाली व्यवस्था ही चयनात्मक नजर आएगी, तो आम जनता से यातायात नियमों के पालन की उम्मीद कैसे की जाएगी?
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