- जेपी के 125 वें और चंद्रशेखर के 100वें जयंती वर्ष पर राष्ट्रीय संगोष्ठी में बोले राज्यसभा के उप सभापति 
बलिया। लोकनायक जयप्रकाश नारायण के 125वें वर्ष और जननायक चंद्रशेखर के 100वें जयंती वर्ष के उपलक्ष्य में गुरुवार को शहर स्थित टीडी कालेज के मनोरंजन सभागार में 'राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं संवाद' कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य वक्ता राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मुख्य वक्ता हरिवंश ने पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के राजनैतिक जीवन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि चंद्रशेखर का राजनीतिक जीवन 65 वर्षों का रहा, जिसमें 40 वर्ष संसद में रहे। वे सिद्धांतों की राजनीति के नायक थे।
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कहा कि भारतीय राजनीति में चंद्रशेखर की तरह स्वाभिमान के धनी दूसरा कोई राजनेता नहीं हुआ। उन्होंने कांग्रेस में रहते हुए सुप्रीम बाडी का विरोध किया। वे आपात काल में सत्ता सुख त्याग कर जेल जाना गंवारा किया। बल्कि यूं कहें कि चंद्रशेखर ने जेल जाना खुद चुना। उनकी जेल जाना मजबूरी थी। वे देश को प्रतिरोध की सीख देना चाहते थे। उन्होंने किताबों का हवाला देते हुए कहा कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी के कैबिनेट मंत्री बनने के प्रस्ताव को ठुकरा कर जेल गए। 

कहा कि चंद्रशेखर विपरीत परिस्थितियों में कैसे सर्वाइव करना है, इसके प्रमाण हैं। उन्होंने जेल में रहते हुए यैगिक क्रियाएं सीखी। जेल में रहते देश की कई भाषाएँ सीखी। 
हरिवंश ने कहा कि उनके अध्यक्ष रहते जनता पार्टी ने पहली बार देश में कांग्रेस को हटा कर हुकूमत किया। वे संसद में रहने के अलावा सीधे प्रधानमंत्री के पद पर गए। चंद्रशेखर की कृति मेरी जेल डायरी के पन्नों को पलटते हुए कहा कि वे विरले राजनेता थे। उन्होंने चंद्रशेखर की जेल डायरी किताब को भाषा के स्तर पर भी उत्कृष्ट बताया। उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर पूरे समाज को ही अपना परिवार मानते थे। उन्होंने अपने किसी भी अलेख में अपने किसी परिजन का जिक्र नहीं किया। हरिवंश ने युवा पीढ़ी को चंद्रशेखर के बारे में गहरा अध्ययन करने की सलाह दी। क्योंकि चंद्रशेखर अपने आप में एक संस्था थे। हरिवंश ने कहा कि जेपी और चंद्रशेखर का राजनीतिक प्रभाव ही था कि कांग्रेस सरकार में संविधान बच पाया। उन्होंने पीएम रहते छह महीने में देश के लिए कई ऐसे कार्य किए जो मील का पत्थर साबित हुए। हरिवंश ने कहा कि आज पूरी दुनिया में ऊर्जा संकट है। बावजूद इसके भारत पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगे बढ़ रहा है। सही और सक्षम नेतृत्व से देश कभी झुकता नहीं है। 
विशिष्ट अतिथि वरिष्ठ पत्रकार विवेक पांडेय ने कहा कि सलाखों के बीच स्वतंत्रता कैसे जी जा सकती है, वह चंद्रशेखर की जेल डायरी में दिखती है। उन्होंने कहा कि बलिया का सौभाग्य है कि आज पूरी दुनिया में चंद्रशेखर की राजनीति के बारे में अध्ययन किया जा रहा है। उन्होंने देश की राजनीति को नई दिशा दी थी। 
बीज वक्तव्य डा. जैनेंद्र पांडेय ने दिया। इस अवसर पर सुभाष चंद्र श्रीवास्तव, मनोरंजन सिंह, डा. अखिलेश राय, अनिल सिंह, आशीष त्रिवेदी, रणवीर सिंह सेंगर, उपेंद्र सिंह, उमेश सिंह, अजय सिंह व मनोज शर्मा आदि थे। अध्यक्षता टीडी कालेज के प्राचार्य डा. दयालानंद राय व संचालन अखिलेश सिन्हा ने किया। 

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स्वच्छता का दिया संदेश
बलिया। राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश ने सभागार में मौजूद लोगों को स्वछता का संदेश दिया। उन्होंने चंद्रशेखर का स्वछता के प्रति आग्रह का जिक्र करते हुए कहा कि हर युवा को अपनी ग्राम पंचायत और विद्यालयों में स्वछता आंदोलन करना चाहिए। इसके लिए सरकार का मुंह नहीं देखना चाहिए 
दिए गए लोक सेवक और मेधा सम्मान
बलिया। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने जननायक चंद्रशेखर विवि के टापरों को स्मृति चिन्ह व शाल देकर सम्मानित किया। इसके अलावा उन्होंने पूर्व प्रमुख अनिल सिंह, प्रवीण सिंह, इफ्तखार खान, रूपेश सिंह, दुष्यंत सिंह, राम प्रकाश यादव, प्रिया, गीता, डा. कादंबनी सिंह, शशिप्रेम देव, मुकेश सिंह, दिलीप कुमार सिंह, उमेश सिंह, भवतोष पांडेय, प्रदीप यादव, अजय सिंह, धर्मेंद्र प्रताप सिंह, खुशी कुमारी, रिया वर्मा, भाग्यलक्ष्मी, रामनाथ पासवान आदि को लोक सेवक और सम्मान दिया।