योगेंद्र सिंह की बलिया में पहली पोस्टिंग से लेकर रसड़ा कोतवाली से हटाए जाने तक का सफर भी कम दिलचस्प नहीं रहा। बलिया शहर कोतवाल के रूप में तैनाती के कुछ ही महीनों बाद डीएम कार्यालय पर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान कोतवाल और छात्रों के बीच हुए विवाद ने खूब चर्चा बटोरी थी। इसके बाद उन्हें लाइन हाजिर कर दिया गया।

हालांकि, कुछ समय बाद लाइन से ही योगेंद्र सिंह को रसड़ा कोतवाली की जिम्मेदारी सौंप दी गई। रसड़ा में दूसरी तैनाती के दौरान भी वह लगातार विभिन्न मामलों को लेकर चर्चा में बने रहे। अब एक बार फिर तबादले के बाद उनकी पोस्टिंग को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

पुलिस विभाग की ओर से तबादले को प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा सकता है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसके कारणों को लेकर अलग-अलग चर्चाएं हैं। ऐसे में बड़ा सवाल यही है कि योगेंद्र सिंह को रसड़ा कोतवाली से हटाने के पीछे केवल प्रशासनिक फेरबदल था या इसके पीछे कोई अन्य कारण भी रहा?

फिलहाल, तबादले की वास्तविक वजह को लेकर आधिकारिक स्तर पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। ऐसे में चर्चाओं और अटकलों के बीच अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय पुलिस विभाग की ओर से सामने आने वाले आधिकारिक कारण का इंतजार करना ही उचित होगा।