जिला अस्पताल से सीएचसी-पीएचसी तक ‘फायर एनओसी’ का इंतजार
शासन-प्रशासन की कवायद के बावजूद सरकारी अस्पतालों में अग्निशमन इंतजाम सवालों के घेरे में


समाचार बैंक | विशेष खोजी रिपोर्ट

बलिया। उत्तर प्रदेश में बागी बलिया की एक अलग पहचान है.जिले में जिला एवं महिला अस्पताल समेत जिले के अधिकांश सरकारी अस्पतालों की अग्निसुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। शासन-प्रशासन की ओर से समय-समय पर अग्निसुरक्षा मानकों का पालन कराने के निर्देश और कवायद किए जाने के बावजूद जिला अस्पताल के नए भवन, पुराने भवन तथा महिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग को अब तक अग्निशमन विभाग की एनओसी नहीं मिल सकी है। यही नहीं, जिले के कई सीएचसी और पीएचसी में भी अग्निसुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं।


जिले के सरकारी अस्पतालों में प्रतिदिन सैकड़ों मरीज और तीमारदार पहुंचते हैं। कई मरीज ऐसे होते हैं जो गंभीर बीमारी, ऑपरेशन अथवा अन्य कारणों से स्वयं चलकर सुरक्षित स्थान तक नहीं जा सकते। ऐसे में आग जैसी आपदा की स्थिति में अग्निशमन उपकरण और सुरक्षित निकास व्यवस्था जीवन बचाने में निर्णायक साबित हो सकती है।

कागजों में सुरक्षा, जमीन पर सवाल

अस्पतालों में अग्निशमन यंत्रों की उपलब्धता, उनकी कार्यशीलता की स्थिति, विद्युत सुरक्षा, आपातकालीन निकास, फायर अलार्म और अन्य निर्धारित व्यवस्थाओं की नियमित जांच बेहद जरूरी है। लेकिन जिले के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में इन व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जब अस्पताल भवनों को फायर एनओसी नहीं मिली है, तो वहां अग्निसुरक्षा मानकों की अनुपालन स्थिति की जिम्मेदारी किसकी है?

जिला अस्पताल के नए भवन पर भी नहीं मिली ‘क्लियरेंस’

जिला अस्पताल का नया भवन हो अथवा पुराना भवन और महिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग—इन भवनों को लेकर अग्निशमन विभाग की एनओसी का मामला गंभीर है। अस्पताल परिसर में मरीजों की आवाजाही और विभिन्न विद्युत उपकरणों के इस्तेमाल को देखते हुए अग्निसुरक्षा की अनदेखी किसी बड़े हादसे का कारण बन सकती है।

सीएचसी-पीएचसी की भी हो जांच

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं का महत्वपूर्ण आधार सीएचसी और पीएचसी हैं। यहां मरीजों का उपचार, प्रसव, भर्ती और विभिन्न चिकित्सा प्रक्रियाएं होती हैं। ऐसे में प्रत्येक स्वास्थ्य केंद्र में पर्याप्त अग्निशमन यंत्र और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था होना जरूरी है।
सवाल यह है कि जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों का अग्निसुरक्षा ऑडिट आखिरी बार कब हुआ? कितने केंद्रों के पास वैध फायर एनओसी है? कितने स्थानों पर अग्निशमन यंत्र कार्यशील स्थिति में हैं?
इन सवालों का स्पष्ट और सार्वजनिक जवाब सामने आना जरूरी है।
सवाल जो जवाब मांगते हैं
● जिला अस्पताल के किन-किन भवनों के पास फायर एनओसी है?
● नए एवं पुराने भवन की अग्निसुरक्षा जांच कब हुई?
● महिला अस्पताल की पुरानी बिल्डिंग की स्थिति क्या है?
● जिले के कितने सीएचसी/पीएचसी के पास वैध फायर एनओसी है?
● कितने अस्पतालों में अग्निशमन यंत्र उपलब्ध और कार्यशील हैं?
● अग्निशमन विभाग ने कमियां मिलने पर अब तक क्या कार्रवाई की?
हादसे के बाद जागेगा सिस्टम?
अस्पताल जैसी संवेदनशील जगहों पर अग्निसुरक्षा को महज औपचारिकता मानना भारी पड़ सकता है। आग लगने के बाद राहत और बचाव की तैयारी से अधिक महत्वपूर्ण है कि हादसा होने से पहले सुरक्षा व्यवस्था पूरी हो।
समाचार बैंक की पड़ताल का सवाल यही है—अगर आज किसी सरकारी अस्पताल में आग लग जाए तो मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने की व्यवस्था कितनी तैयार है?
जिम्मेदार विभागों को कागजी कवायद से आगे बढ़कर जिले के सभी सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों का तत्काल अग्निसुरक्षा ऑडिट, फायर एनओसी की स्थिति सार्वजनिक करने और कमियों को समयबद्ध तरीके से दूर कराने की जरूरत है।

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