विद्युत नियामक आयोग ने मांगा था रिपोर्ट जिसमें हुआ खुलासा 2 घंटे से अधिक समय के बाद कुल लगभग 193143 स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं की रिचार्ज के बाद जुड़ी बिजली
लखनऊ : पूरे उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर की खुल गई पोल। पावर कॉरपोरेशन कह रहा था कि रिचार्ज होने के तुरंत बाद जुड़ रही है बिजली अब लाखों विद्युत उपभोक्ताओं का मामला जब आया सामने अब उपभोक्ता परिषद ने सभी को रुपया 50 के हिसाब से एक करोड़ से ज्यादा का माँगा मुआवजा ।
उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग में फिर दाखिल किया लोक महत्व प्रस्ताव कहां 1912 पर मुआवजा मांगने का कोई पारदर्शी व्यवस्था नहीं ऐसे में सभी लाखों विद्युत उपभोक्ताओं को स्वत तुरंत दिलाया जाए मुआवजा।
उत्तर प्रदेश में स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रणाली को लेकर उपभोक्ताओं की समस्याओं और विद्युत आपूर्ति बहाली में हो रही देरी के संबंध में उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद द्वारा गंभीर सवाल उठाए गए थे और मार्च के महीने में विद्युत नियामक आयोग में मुआवजा देने के लिए याचिका दाखिल की गई थी जिस पर उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने सभी बिजली कंपनियों से 15 दिन में रिपोर्ट तलब की थी।
परिषद द्वारा मार्च माह में उत्तर प्रदेश विद्युत नियामक आयोग में एक लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल कर यह मांग की गई थी कि विद्युत नियामक आयोग द्वारा बनाए गए स्टैंडर्ड आप परफॉर्मेंस रेगुलेशन 2019 के क्लॉज 16.11 के अनुसार, यदि स्मार्ट प्रीपेड मीटर के तहत रिचार्ज के बाद 2 घंटे के भीतर विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं होती है, तो उपभोक्ताओं को ₹50 प्रति दिन का मुआवजा दिया जाए।
इस पर आयोग ने सभी बिजली कंपनियों से रिपोर्ट तलब की थी। अब पावर कॉरपोरेशन द्वारा आयोग के समक्ष प्रस्तुत रिपोर्ट को लेकर गंभीर तथ्य सामने आए हैं, जिनसे व्यापक अनियमितताओं की आशंका व्यक्त की जा रही है।
उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन की तरफ से निदेशक वाणिज्य पावर कारपोरेशन ने विद्युत नियामक आयोग में पूरी रिपोर्ट सौंप दी है जिसके बाद बिजली कंपनियों की पूरी पोल खुल गई ।
आयोग में रिपोर्ट दाखिल होते ही उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष हुआ राज्य सलाहकार समिति के सदस्य अवधेश कुमार वर्मा ने विद्युत नियामक आयोग में पुणे एक लोक महत्व प्रस्ताव दाखिल करते हुए कहा कि विद्युत नियामक आयोग में पावर कारपोरेशन ने कहा है कि कोई उपभोक्ता मुआवजा नहीं मांगा या गलत है 1912 पर मुआवजा मांगे जाने पर उपभोक्ताओं को कोई भी जवाब नहीं दिया जाता इसलिए सभी लाखों विद्युत उपभोक्ताओं को सट्टा मुआवज रुपया 50 के हिसाब से उनके कनेक्शन पर रिचार्ज किया जाए कल कल मुआवजा लगभग 1 करोड़ से अधिक का होगा।
पूरे उत्तर प्रदेश में पावर कॉरपोरेशन द्वारा आयोग में सौंप गई रिपोर्ट के अनुसार 13 मार्च 2026 से 10 अप्रैल 2026 तक40 27307 स्मार्ट प्रीपेड मीटर विद्युत उपभोक्ताओं के नेगेटिव बैलेंस पर कनेक्शन काटे गए जिसमें से 24 लाख 14179 स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं ने रिचार्ज किया कारपोरेशन के अनुसार 22 लाख 21036 स्मार्ट प्रीपेड मीटर विद्युत उपभोक्ताओं के कनेक्शन 2 घंटे के अंदर रिचार्ज करते ही जुड़ गए। सबसे चौंकाने वाला मामला यह है कि 193143 विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कनेक्शन रिचार्ज किए जाने के 2 घंटे के बाद जुड़ा ऐसे में सभी को स्वत मुआवजा दिया जाना चाहिए
रिपोर्ट में सामने आए प्रमुख तथ्य:
पावर कॉरपोरेशन ने स्वीकार किया है कि नेगेटिव बैलेंस के कारण कनेक्शन कटने के बाद, रिचार्ज किए जाने के बावजूद लाखों विद्युत उपभोक्ताओं की समय पर विद्युत आपूर्ति बहाल नहीं हुई।
नियमानुसार 2 घंटे के भीतर आपूर्ति बहाल होनी चाहिए, अन्यथा मुआवजा देय है।
लगभग 1,93,143 उपभोक्ताओं के कनेक्शन 2 घंटे से अधिक समय तक पुनः चालू नहीं हो सके।
कुल 24,14,179 उपभोक्ताओं के रिचार्ज मामलों में से लगभग 8% मामलों में देरी दर्ज की गई।
कई तिथियों पर 18% से 23% तक उपभोक्ताओं की आपूर्ति निर्धारित समय सीमा में बहाल नहीं हुई।
इसके बावजूद रिपोर्ट में यह दर्शाया गया कि किसी भी उपभोक्ता ने मुआवजे का दावा नहीं किया, जो कि परिषद के अनुसार तथ्यात्मक रूप से गलत एवं भ्रामक है।
गंभीर चिंताएं:
स्टैंडर्ड आप परफॉर्मेंस रेगुलेशन 2019 का प्रभावी क्रियान्वयन नहीं हुआ।
मुआवजा देने हेतु कोई पारदर्शी या स्वचालित प्रणाली विकसित नहीं की गई।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रणाली की तकनीकी विश्वसनीयता पर प्रश्नचिह्न लग रहा है।
वितरण कंपनियों एवं मीटर लगाने वाली एजेंसियों की जवाबदेही तय नहीं की गई।
1912 शिकायत प्रणाली में पारदर्शिता की कमी के कारण उपभोक्ताओं को उनका वैधानिक मुआवजा नहीं मिल पा रहा है।
उपभोक्ता परिषद की प्रमुख मांगें:
सभी प्रभावित उपभोक्ताओं को बिना आवेदन के स्वतः (Auto Compensation) मुआवजा प्रदान करने के निर्देश दिए जाएं।
स्टैंडर्ड आप परफॉर्मेंस रेगुलेशन 2019 के अनुपालन हेतु एक पारदर्शी एवं स्वचालित मुआवजा प्रणाली लागू की जाए।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर प्रणाली की स्वतंत्र तकनीकी जांच कराई जाए।
दोषी वितरण कंपनियों एवं संबंधित एजेंसियों पर आर्थिक दंड एवं कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने हेतु स्पष्ट दिशानिर्देश जारी किए जाएं।