बलिया। पुराने इंडस्ट्रियल फीडर से अलग कर बनाए गए न्यू सिविल लाइन फीडर से जुड़े उपभोक्ताओं की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ती नजर आ रही हैं। उपभोक्ताओं का आरोप है कि कटौती के नाम पर प्रतिदिन कई घंटे बिजली गुल रहती है। स्थिति यह है कि कई दिनों में करीब 8 से 10 घंटे तक आपूर्ति बाधित होने से लोगों की दिनचर्या से लेकर रात की नींद तक प्रभावित हो रही है।

उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली कब आएगी और कब जाएगी, इसकी स्पष्ट जानकारी देने वाला कोई जिम्मेदार कर्मचारी या अधिकारी उपलब्ध नहीं रहता। शिकायत करने के लिए फोन मिलाने पर कई बार अधिकारियों के फोन नहीं उठते। इससे उपभोक्ताओं में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

जर्जर तार बने बार-बार शटडाउन की वजह

गड़वार रोड क्षेत्र में कई स्थानों पर बिजली के जर्जर तार लटकने की शिकायत भी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों के मुताबिक तारों की खराब स्थिति के कारण बार-बार लाइन बंद कर मरम्मत करनी पड़ती है। नतीजतन कुछ अंतराल पर बिजली आपूर्ति रोक दी जाती है और उपभोक्ताओं को लगातार कटौती का सामना करना पड़ता है।

लोगों का कहना है कि यदि जर्जर तारों और पुराने विद्युत ढांचे को स्थायी रूप से दुरुस्त कर दिया जाए तो बार-बार होने वाले शटडाउन में काफी कमी आ सकती है। केवल फाल्ट होने के बाद मरम्मत करने के बजाय कमजोर नेटवर्क को चिन्हित कर उसका स्थायी समाधान किए जाने की जरूरत है।

गर्मी और उमस में रात की नींद भी हराम

लगातार बिजली कटौती का सबसे ज्यादा असर रात के समय दिखाई दे रहा है। पंखे और कूलर बंद होने से उमस भरी गर्मी में परिवारों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। उपभोक्ताओं का कहना है कि बिजली की अनिश्चित आपूर्ति के कारण बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को विशेष परेशानी होती है।

बलिया में इससे पहले भी सिविल लाइन सहित शहर के कई इलाकों में लंबे समय तक बिजली गुल रहने और शिकायतों का समय पर समाधान न होने की खबरें सामने आ चुकी हैं।

आखिर कटौती का स्थायी समाधान कब?

उपभोक्ताओं का सवाल है कि यदि न्यू सिविल लाइन फीडर अलग बनाने का उद्देश्य बेहतर और व्यवस्थित बिजली आपूर्ति देना था, तो लगातार कटौती क्यों हो रही है? क्या फीडर की क्षमता, लाइन और ट्रांसफॉर्मर व्यवस्था की तकनीकी समीक्षा हुई है? यदि जर्जर तार और पोल समस्या की वजह हैं तो उन्हें समय रहते बदला क्यों नहीं जा रहा?

वहीं कुछ उपभोक्ताओं ने विद्युत व्यवस्था के लिए स्वीकृत धनराशि के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए हैं और तार-पोल आदि के लिए आए धन के कथित दुरुपयोग की जांच की मांग की है। हालांकि इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और इसके संबंध में विभागीय पक्ष सामने आना बाकी है।

1912 पर शिकायत और जवाबदेही जरूरी

बिजली उपभोक्ताओं की शिकायतों के समाधान के लिए 1912 हेल्पलाइन की व्यवस्था है। जून 2026 में बलिया में बिजली विभाग की समीक्षा के दौरान शिकायतों का समयबद्ध निस्तारण नहीं होने पर कार्रवाई भी हुई थी।

ऐसे में न्यू सिविल लाइन फीडर की समस्या पर भी विभाग को केवल अस्थायी शटडाउन और फाल्ट मरम्मत तक सीमित रहने के बजाय फीडर की तकनीकी जांच, जर्जर तार-पोल का सर्वे, ओवरलोड की स्थिति और वास्तविक कटौती का रिकॉर्ड सार्वजनिक करना चाहिए। उपभोक्ताओं को भी यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि बिजली किस कारण और कितनी देर के लिए काटी जा रही है।

अब देखना यह है कि न्यू सिविल लाइन फीडर की लगातार बिगड़ती व्यवस्था पर विभाग कब गंभीरता दिखाता है और उपभोक्ताओं को कटौती से स्थायी राहत मिलती है या फिर हर बार की तरह फाल्ट और शटडाउन के नाम पर समस्या टाल दी जाती है।