नगर के कई जगहों पर कटहल नाला के माध्यम से गंगा में बहा रहे कूड़ा- कचड़ा

प्रदीप मयंक

बलिया : जिले के कटहल नाला सहित प्रसिद्ध स्थलों को लेकर एनजीटी ने पर्यावरण विभाग के अफसरों के साथ ही जिला प्रशासन को भी फटकार लगाते हुए कारण पूछा है. बलिया के शहीद स्मारक में जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय में निर्माण कार्य व कटहल नाला में बह रहा है गंदगी से नाराज नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी ) के आला अफसरो ने पर्यावरण विभाग व जिला प्रशासन से जवाब तलब किया है. इसको लेकर विभाग के अफसरों में अफरा-तफरी मची हुई है. सबसे दिलचस्प है कि सुरहा ताल के आसपास के इलाके को इको जोन घोषित किया गया था. लेकिन विभागीय अफसर व कर्मचारियों की उदासीनता के चलते भट्ठा संचालकों को भट्ठा संचालित करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र दे दिया गया. जब यह मामला सामने आया तो विभागीय अफसरों की नींद उड़ गई.


बता दें कि बलिया जनपद में कटहल नाला व सुरहा ताल एक दूसरे के पूरक ही नहीं बल्कि इनका आपस में गहरा नाता भी रहा. बरसात व बाढ़ के समय गंगा नदी में पानी अधिक होने पर सुरहा में जाने लगता हा. यही नदी के पानी कम होने पर गंगा में पानी जाने लगता है. लेकिन पर्यावरण विभाग के अफसर की अनदेखी के चलते इन दोनों स्थलों पर लोग को दृष्टि लगाए हुए आलम यह है कि जनपद की सुंदरता देने वाले कटहर नाला में वर्षों से लोग अपने-अपने घरों के शौचायलयों का पानी सीधे नाले के माध्यम से गंगा नदी में गिरा रहे है. जबकि पर्यावरण मंत्रालय व एनजीटी के अफसरों का मानना है कि शौचालयों का पानी ट्रीट करने के बाद ही उसे नदी या नाले प्रवाहित किया जाए. ऐसे में लोग जानबूझकर कटहल नाला में शौचालय का पानी व मरे हुए पशु पक्षियों का अपशिष्ट बेधडक फेंक देते हैं.

जिससे गर्मी के मौसम में लोगों का कटहल नाले से होकर गुजरना भी मुश्किल हो जाता है. अभी हाल ही में कटहल नाले की दुर्गंध व विभागीय अफसर की उदासीनता को लेकर एक खबर समाचार बैंक द्वारा पर प्रकाशित की गई. जिसका संज्ञान लेते हुए एनजीटी व पर्यावरण विभाग के अफसर में जनपद को मंडल स्तरीय अधिकारियों से जवाब तलब किया है अब देखना यह है कि कटहल नाला किया स्थित जुहू चौपाटी किस तरह से विकसित होता है. शासन और पर्यावरण महकमे के अफसरों की टीम कटहल नाला को साफ और सुंदर बनाने दिशा में कौन सा कदम उठाते हैं.