बलिया/लखनऊ : जनता के बीच यह सवाल उठ रहा है कि IGRS पर शिकायत दर्ज होने के बाद क्या हर मामले में शिकायतकर्ता की वास्तविक समस्या का समाधान हो पा रहा है?
कई शिकायतकर्ताओं का कहना है कि शिकायत के बाद कथित तौर पर बिना मौके पर पर्याप्त जांच किए रिपोर्ट लगा दी जाती है, जबकि ऑनलाइन पोर्टल पर शिकायत का ‘निस्तारण’ दिख जाता है। हालांकि, इन आरोपों की संबंधित मामलों में स्वतंत्र पुष्टि किया जाना आवश्यक है।
कुछ लोगों का यह भी आरोप है कि ऑनलाइन निस्तारण के बावजूद जमीनी स्तर पर समस्या बनी रहती है, जिसके चलते उन्हें दोबारा संबंधित अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं।
ऐसे में जनता का सवाल है—
अगर शिकायतकर्ता की बात पूरी तरह सुने बिना या मौके पर स्थिति की समुचित जांच किए बिना शिकायत का निस्तारण कर दिया जाए, तो क्या उसे वास्तविक समाधान माना जाना चाहिए?
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