"विवेक पांडेय" वरिष्ठ पत्रकार

अपां नपात रसयन्ति यत्र देवाः समोपमाः।उत तवा सोमाः सोमपीतये यथा न व्यथयन्ति॥ - अथर्ववेद (7.70.1)

बलिया/नई दिल्ली : भारत के ज्यादातर खासकर बड़े शहरों में पानी की समस्या बढ़ रही है. पिछले दिनों बैंगलोर की हालत हम सबके सामने ही थी. ऐसे में बडे़ शहरों में बिल्डर्स ने इस समस्या के भविष्य को भांप लिया है. यही कारण है कि वह समझ गए हैं कि अगर मकान बेचना है तो सबसे ज्यादा केंद्र में पानी की व्यवस्था ही होगी. प्लैट्स या प्रॉपर्टी की कीमत और लोकप्रियता लग्जरी से ज्यादा "पानी" की व्यवस्था पर निर्भर होगी. ब्रोकर्स ने साफ कहना शुरू कर दिया है कि घर के खरीददारों का पहला सवाल पानी को लेकर ही है. यही कारण है कि बड़े बिल्डर्स ने तो पानी की व्यवस्था को लेकर इंतजाम शुरू कर दिए हैं. इसके लिए ये काम शुरू भी हो गए हैं.

1. वर्षा जल संचय (Rainwater Harvesting): यह एक प्रकार का तकनीक है जिसमें वर्षा के समय जल को संचित किया जाता है ताकि यह उपयोग में आ सके. यह जल संचयन प्रणाली जल संकट से निपटने में सहायक होती है और पानी की बचत को बढ़ावा देती है.

2. छत से जल संचय (Terrace Water Collection): इस तकनीक में, घरों या इमारतों की छतों से जल को संचित किया जाता है और इसे उपयोग के लिए बचाया जाता है. यह जल संचयन का एक और सुझावपूर्ण तरीका है जो पानी की बचत करता है और जल संकट को कम करता है.

3. प्रयुक्त जल का उपचार (Treating Used Water): यह तकनीक वास्तविकता में जल संचयन के बाद का एक महत्वपूर्ण पहलू है. इसमें उपयोग किए जाने वाले जल को साफ करके पुनः प्रयोग के लिए उपयुक्त बनाया जाता है. यह तकनीक प्रदूषण को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और पानी की बचत को बढ़ावा देती है. यह पूरी स्थिति न सिर्फ रियल स्टेट मार्केट को प्रभावित करने वाली है बल्कि इसका असर लोकल बिजनेस और आर्थिक विकास पर भी पडे़गा. पानी की अच्छी व्यवस्था ही निवेश को आकर्षिक करने का कारक बन सकती है. बड़े बिल्डर्स ने यह काम शुरू कर दिया है लेकिन, अभी मझौले और छोटे बिल्डर्स को भी इस काम में लगना होगा.