बलिया। विद्युत वितरण खंड द्वितीय का न्यू सिविल लाइन क्षेत्र इन दिनों बिजली व्यवस्था की बदहाली का ऐसा उदाहरण बन गया है, जहां उपभोक्ताओं को बिजली बिल तो समय पर देना पड़ता है, लेकिन बदले में नियमित बिजली आपूर्ति मिलना मुश्किल हो गया है। स्थानीय उपभोक्ताओं का आरोप है कि 24 घंटे में 12 घंटे भी निर्बाध बिजली नहीं मिल पा रही है। कभी ट्रिपिंग तो कभी फाल्ट और कभी जर्जर तारों के नाम पर बिजली कटौती का सिलसिला जारी रहता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर वर्षों से जर्जर पड़े तारों को बदला क्यों नहीं जा रहा? क्या विभाग किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है?
गड़वार मार्ग पर ‘लटकता खतरा’, बारिश होते ही गुल हो जाती है बिजली
गड़वार मार्ग सहित कई स्थानों पर जर्जर बिजली के तार मुख्य मार्ग के आसपास लटकने की शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हल्की बारिश या हवा चलने के बाद फाल्ट के नाम पर घंटों बिजली गायब हो जाती है।
उपभोक्ताओं का सवाल है कि यदि तार इतने जर्जर हैं कि मामूली हवा और बारिश में आपूर्ति बाधित हो जाती है, तो उन्हें बदलने की जिम्मेदारी किसकी है?
क्या किसी बड़े हादसे के बाद ही विभाग की नींद खुलेगी?
तार बदलने के नाम पर ‘खेल’ का आरोप
उपभोक्ताओं ने विभागीय व्यवस्था पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जर्जर तारों को बदलने के नाम पर कागजों में काम और जमीन पर खानापूर्ति किए जाने की आशंका बनी रहती है। कुछ उपभोक्ताओं ने आरोप लगाया कि विद्युत कार्यों के लिए कथित तौर पर अनौपचारिक भुगतान की मांग की जाती है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इन आरोपों की वास्तविकता सामने लाने के लिए विभागीय अभिलेखों, कार्यादेशों और मौके पर हुए कार्यों की जांच जरूरी है।
डीपी लगवानी हो या तार बदलना-‘बिना पैसे काम नहीं’ का आरोप
स्थानीय उपभोक्ताओं का दावा है कि डीपी लगवाने, तार बदलने अथवा अन्य विद्युत कार्यों के लिए कथित तौर पर पैसे मांगे जाते हैं। आरोप तो यहां तक हैं कि छोटे से छोटे काम के लिए भी उपभोक्ता को अपनी जेब ढीली करनी पड़ती है।
अगर ये आरोप सही हैं तो सवाल सिर्फ बिजली आपूर्ति का नहीं, बल्कि उपभोक्ताओं के अधिकार और विभागीय जवाबदेही का भी है।
फोन कौन उठाएगा? बिजली गई तो उपभोक्ता जाए कहां?
बिजली कटने के बाद उपभोक्ताओं की दूसरी बड़ी समस्या शिकायत दर्ज कराने की है। लोगों का आरोप है कि दिन हो या रात, बिजली गायब होने के बाद पावर हाउस के फोन कई बार नहीं उठते।
गर्मी से बेहाल उपभोक्ता जब लगातार बिजली कटौती के बाद पावर हाउस पहुंचते हैं तो विवाद की स्थिति पैदा हो जाती है। कई बार मामला कहासुनी और गाली-गलौज तक पहुंचने की बात भी सामने आती है।
सवाल यह है कि जब शिकायत सुनने के लिए फोन ही नहीं उठेगा तो उपभोक्ता अपनी समस्या किसके सामने रखेगा?
‘बजट नहीं है’, क्या यह जर्जर तारों का स्थायी बहाना है?
विभागीय स्तर पर यह तर्क दिया जाता है कि जर्जर तार बदलने के लिए अलग से धनराशि आवंटित नहीं होती। यदि ऐसा है तो फिर वर्षों से जर्जर तारों के बीच बिजली आपूर्ति कैसे सुरक्षित रखी जा रही है?
उपभोक्ताओं का कहना है कि बजट की कमी अपनी जगह है, लेकिन सुरक्षा और जवाबदेही उससे बड़ी चीज है।
हर आधे घंटे में ट्रिपिंग, बिल पूरा—सुविधा अधूरी
न्यू सिविल लाइन क्षेत्र में उपभोक्ताओं की शिकायत है कि बिजली आने के बाद भी स्थिति सामान्य नहीं होती। थोड़ी देर आपूर्ति के बाद फिर कटौती या ट्रिपिंग हो जाती है। गर्मी के मौसम में यह समस्या बुजुर्गों, बच्चों, दुकानदारों और छोटे कारोबारियों के लिए विशेष रूप से परेशानी का कारण बन रही है।
उपभोक्ताओं का कहना है कि जब बिजली की आपूर्ति नियमित नहीं है तो उपभोक्ताओं से पूरी सुविधाओं की अपेक्षा कैसे की जा सकती है?
मीडिया में खबरें छपने के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं?
क्षेत्र की विद्युत समस्याओं को लेकर खबरें प्रकाशित होने के बावजूद यदि व्यवस्था में सुधार नहीं हो रहा है तो यह विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
क्या अधिकारियों को जमीनी हकीकत की जानकारी नहीं है, या शिकायतों के बावजूद कार्रवाई करने की जरूरत महसूस नहीं की जा रही?
अब जरूरत केवल बयान जारी करने की नहीं, बल्कि जर्जर तारों का भौतिक सत्यापन, फाल्ट और ट्रिपिंग का रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, विद्युत कार्यों में हुए खर्च का ऑडिट कराने और कथित अवैध वसूली की निष्पक्ष जांच की है।
बड़े सवाल, जिनका जवाब विभाग को देना चाहिए
- न्यू सिविल लाइन में 24 घंटे में औसतन कितने घंटे बिजली आपूर्ति होती है?
- गड़वार मार्ग के जर्जर तारों को अब तक क्यों नहीं बदला गया?
- पिछले वर्षों में तार और विद्युत लाइन सुधार के नाम पर कितना बजट खर्च हुआ?
- कितने स्थानों पर डीपी और तार बदलने के कार्य स्वीकृत हुए और कितने वास्तव में जमीन पर हुए?
- उपभोक्ताओं से पैसे मांगने की शिकायतों पर कितनी जांच हुई?
- बिजली कटौती और फाल्ट की शिकायतों का विभाग के पास क्या रिकॉर्ड है?
- शिकायत के बाद मौके पर पहुंचने में कर्मचारियों को औसतन कितना समय लगता है?
- पावर हाउस के शिकायत नंबर पर फोन नहीं उठने की शिकायतों की जिम्मेदारी किसकी है?
न्यू सिविल लाइन के उपभोक्ता अब सिर्फ बिजली नहीं, जवाब मांग रहे हैं—आखिर उन्हें बिल के बदले नियमित बिजली और सुरक्षित विद्युत व्यवस्था कब मिलेगी?
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