लखनऊ / बलिया: जिले में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के तहत आयुष चिकित्सा अधिकारी (आयुर्वेद एवं यूनानी) के पदों पर भर्ती में हुई अनियमितताओं और भेदभाव को लेकर 17 जुलाई 2025 को याचिका संख्या 7880/2025 इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में दाखिल की गई। जिसपर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति मनीष माथुर ने मामले की गंभीरता को समझते हुए, जवाब दाखिल करने के निर्देश शासन को दे दिए। इसके बाद, बलिया के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने इंटरव्यू को अस्थायी रूप से टाल दिया है।


इस याचिका में कहा गया है कि इंटरव्यू के लिए जिन अभ्यर्थियों को बुलाया गया, उनमें ज़्यादातर होम्योपैथी स्ट्रीम से हैं और उनके पास अनुभव प्रमाणपत्र नहीं है। वहीं, आयुर्वेद और यूनानी स्ट्रीम के योग्य अभ्यर्थियों को 6 महीने का अनुभव न होने के नाम पर बाहर कर दिया गया, जबकि शासनादेश दिनांक 02.02.2023 में साफ कहा गया है कि अनुभव वांछनीय (optional) है, अनिवार्य नहीं।

इसके अलावा कुछ याचिकाकर्ताओं को इसी भर्ती में दूसरे जिलों में इंटरव्यू के लिए बुलाया गया है, जिससे साफ होता है कि चयन प्रक्रिया एक जैसी नहीं है और अलग-अलग जिलों में अलग नियम अपनाए जा रहे हैं।
याचिका पहले 22 जुलाई को सूचीबद्ध थी, लेकिन चूंकि इंटरव्यू 21, 22 और 23 जुलाई को होना था, इसलिए एडवोकेट चंदन कुमार पांडेय ने माननीय न्यायमूर्ति मनीष माथुर के समक्ष केस का जिक्र कर फौरन सुनवाई की मांग की।
हाईकोर्ट ने मामले की गंभीरता को समझते हुए, जवाब दाखिल करने के निर्देश शासन को दे दिए। इसके बाद, बलिया के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) ने इंटरव्यू को अस्थायी रूप से टाल दिया है।
प्रोएक्टिव लीगल, लखनऊ की ओर से याचीकर्ता के एडवोकेट चंदन कुमार पांडेय, एडवोकेट राजकुमार मिश्रा ने हाईकोर्ट में तर्क रखा। उन्होंने मीडिया को जानकारी देते हुए बताया कि यह हाईकोर्ट की कार्रवाई का सकारात्मक असर है और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।