निदेशक चिकित्सा के पत्र पर कार्रवाई का इंतजार, कई माह से मामला लंबित होने का आरोप
बलिया। रसड़ा क्षेत्र की एक निलंबित एएनएम की कथित फर्जी नियुक्ति का मामला एक बार फिर सुर्खियों में है। गुरुवार को मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय में इस प्रकरण को लेकर काफी देर तक हंगामा और गहमागहमी का माहौल बना रहा। मामले से जुड़े लोगों ने नियुक्ति अभिलेखों और निदेशक चिकित्सा के पत्र के अनुपालन को लेकर विभागीय कार्रवाई पर सवाल उठाए।
जानकारी के अनुसार, नियुक्ति से जुड़े इस प्रकरण में निदेशक चिकित्सा की ओर से जारी पत्र में नियुक्ति पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। पत्र के माध्यम से मुख्य चिकित्साधिकारी को संबंधित एएनएम के आरोपों को समाचार पत्रों में प्रकाशित कराकर निर्धारित अवधि में उनका जवाब प्राप्त करने के निर्देश दिए गए थे।
आरोप है कि निदेशक का उक्त पत्र कई माह से लंबित है और उसके अनुरूप अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं की गई। इसी मुद्दे को लेकर गुरुवार को मामला फिर गरमा गया।
बातचीत के दौरान बढ़ा विवाद
बताया जा रहा है कि मामले से जुड़े एक पैरोकार और मुख्य चिकित्साधिकारी के बीच बातचीत चल रही थी। इसी दौरान स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ लिपिक दयाशंकर के हस्तक्षेप के बाद स्थिति बिगड़ गई। देखते ही देखते कार्यालय में तीखी बहस और हंगामा शुरू हो गया। काफी देर तक कर्मचारियों और मामले से जुड़े लोगों के बीच गहमागहमी बनी रही।
हंगामे के दौरान नियुक्ति से संबंधित दस्तावेजों, निदेशक चिकित्सा के पत्र तथा उसके अनुपालन को लेकर सवाल-जवाब होते रहे। मामले को लेकर कार्यालय में मौजूद लोगों के बीच भी चर्चा का माहौल बना रहा।
अब कार्रवाई पर टिकी नजर
इस पूरे प्रकरण में सबसे बड़ा सवाल यह है कि निदेशक चिकित्सा की ओर से जारी पत्र पर स्वास्थ्य विभाग ने अब तक क्या कार्रवाई की और यदि कार्रवाई लंबित है तो इसकी वजह क्या है? साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि संबंधित एएनएम की नियुक्ति किन अभिलेखों और प्रक्रिया के आधार पर हुई थी।
हालांकि, किसी नियुक्ति को अंतिम रूप से फर्जी ठहराने से पहले मूल नियुक्ति अभिलेख, चयन प्रक्रिया, प्रमाणपत्र, विभागीय आदेश और संबंधित दस्तावेजों की जांच आवश्यक है। इसलिए नियुक्ति वास्तव में फर्जी थी या नहीं, यह विभागीय जांच और अभिलेखों के परीक्षण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
उठ रहे हैं कई सवाल
मामले ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। यदि निदेशक स्तर से किसी प्रकरण में जांच अथवा जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए गए थे, तो उसका समयबद्ध अनुपालन क्यों नहीं हुआ? यदि पत्र पर कार्रवाई हो चुकी है, तो उसका रिकॉर्ड क्या है? और यदि कार्रवाई लंबित है, तो जिम्मेदारी किसकी है?
अब निगाहें मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय और स्वास्थ्य विभाग की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। विभागीय जांच में यदि नियुक्ति प्रक्रिया में अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
समाचार बैंक की नजर:
मामला आरोपों से जुड़ा होने के कारण संबंधित पक्ष का आधिकारिक पक्ष और विभागीय जांच का निष्कर्ष सामने आना बेहद जरूरी है। निष्पक्ष जांच के बाद ही यह तय हो सकेगा कि नियुक्ति में वास्तव में कोई फर्जीवाड़ा या अनियमितता हुई थी अथवा नहीं।
Comments
No comments yet.