वैदिक मंत्रोच्चार के बीच निभाई गई परंपरा, 25 दिनों तक चलेगा ऐतिहासिक मेला; पशु मेला, मीना बाजार और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे आकर्षण

बलिया। आस्था, परंपरा और लोकसंस्कृति के प्रतीक बलिया के ऐतिहासिक ददरी मेले का ध्वज पूजन के साथ शुभारंभ हुआ। नगर पालिका परिषद बलिया के अध्यक्ष संतकुमार गुप्ता उर्फ मिठाईलाल के नेतृत्व में मेला परिसर में वैदिक मंत्रोच्चार और विधि-विधान के साथ पूजन-अर्चन किया गया।

ध्वज पूजन कार्यक्रम में नगर पालिका के सभासदों, प्रभारी अधिशासी अधिकारी, नगर मजिस्ट्रेट सहित नगर पालिका के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। परंपरा के अनुसार ददरी मेले का आयोजन नगर पालिका परिषद बलिया की ओर से किया जाता है।

‘समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है ददरी मेला’

ध्वज पूजन के बाद नगर पालिका अध्यक्ष संतकुमार गुप्ता ने जनपदवासियों और श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि ददरी मेला बलिया की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, आस्था और लोकपरंपराओं का प्रतीक है। उन्होंने ईश्वर से प्रार्थना की कि यह मेला सभी के जीवन में सुख, समृद्धि और खुशहाली लेकर आए। उन्होंने कहा कि इस बार मेले को और भव्य एवं सुव्यवस्थित बनाने की तैयारी की गई है।

नगर पालिका अध्यक्ष के अनुसार, मेले की अवधि कार्तिक पूर्णिमा के पवित्र स्नान से शुरू होकर लगभग 25 दिनों तक रहेगी।

भारतेंदु हरिश्चंद्र के लेखों में भी मिलता है उल्लेख

महर्षि भृगु की तपोभूमि बलिया में आयोजित होने वाला ददरी मेला ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष महत्व रखता है। मेले का उल्लेख हिंदी साहित्यकार भारतेंदु हरिश्चंद्र के लेखों में भी मिलता है। यहां लगने वाला पशु मेला, मीना बाजार, सांस्कृतिक कार्यक्रम और कार्तिक पूर्णिमा का पवित्र स्नान श्रद्धालुओं एवं आगंतुकों के प्रमुख आकर्षण रहते हैं।

परंपरा के अनुसार, कार्तिक पूर्णिमा के मुख्य स्नान से पहले पशु मेले के साथ आयोजन का पहला चरण शुरू होता है। इसके बाद श्रद्धालुओं की आवाजाही बढ़ने लगती है।

तैयारियां तेज, व्यवस्था पर रहेगा जोर

ध्वज पूजन के साथ ही मेला क्षेत्र में तैयारियां तेज होने की बात कही गई है। मेले में आने वाले श्रद्धालुओं और आगंतुकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए साफ-सफाई, सुरक्षा तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं पर जोर दिया जा रहा है।

ददरी मेला केवल व्यापारिक आयोजन नहीं, बल्कि बलिया की ऐतिहासिक पहचान, लोकजीवन और सांस्कृतिक परंपराओं से जुड़ा महत्वपूर्ण उत्सव है