अधिवक्ता समेत परिवार के सदस्यों पर फायरिंग कर हत्या के प्रयास का था आरोप | क्रॉस केस में सभी आरोपी बरी
बलिया। बांसडीह रोड थाना क्षेत्र के ग्राम शेर (बड़की शेरिया) में करीब दो दशक पहले हुए जानलेवा हमले और हत्या के प्रयास के मामले में अदालत ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अपर सत्र न्यायाधीश सैफ अहमद की अदालत ने छह अभियुक्तों को दोषसिद्ध पाते हुए प्रत्येक को 10-10 वर्ष के कारावास और अर्थदंड से दंडित किया। वहीं इसी प्रकरण से जुड़े क्रॉस केस में अभियोजन आरोप सिद्ध करने में विफल रहा, जिसके बाद अदालत ने सभी आरोपियों को दोषमुक्त करते हुए बाइज्जत बरी करने का आदेश दिया।
प्रधान पद के चुनाव की रंजिश बनी हमले की वजह
अभियोजन के अनुसार ग्राम शेर निवासी मिथिलेश कुमार सिंह पुत्र मथुरा सिंह ने थाना बांसडीह रोड में तहरीर देकर बताया था कि ग्राम पंचायत चुनाव में स्वर्गीय संतोष सिंह प्रधान निर्वाचित हुए थे। वादी पक्ष ने उनके समर्थन में चुनाव में भूमिका निभाई थी। संतोष सिंह की हत्या के बाद रिक्त हुए प्रधान पद के चुनाव में उनकी पत्नी सीमा सिंह प्रत्याशी बनीं और वादी पक्ष उनके समर्थन में था।
तहरीर में आरोप लगाया गया कि जवाहर गोड़, जो पूर्व में संतोष सिंह के खिलाफ प्रधान पद का चुनाव लड़ चुका था, इस बार सीमा सिंह के विरुद्ध चुनाव मैदान में था। इसी राजनीतिक रंजिश के चलते वादी और उसके परिवार पर सीमा सिंह का समर्थन नहीं करने के लिए दबाव बनाया जा रहा था।
हथियारों से लैस होकर दरवाजे पर पहुंचे थे आरोपी
अभियोजन कथानक के मुताबिक 27 नवंबर 2006 को शाम करीब 4:30 बजे जवाहर गोड़, रामानन्द गोड़, मुन्नीलाल उर्फ मुनील, जयचन्द गोड़, विजेन्द्र वर्मा तथा शिवकुमार उर्फ फन्नी कथित रूप से हथियारों से लैस होकर वादी के दरवाजे पर पहुंचे।
आरोप था कि आरोपियों ने सीमा सिंह का समर्थन नहीं करने के लिए दबाव बनाया। विरोध करने पर कहासुनी हुई। आसपास के लोगों के पहुंचने पर आरोपी पीछे हटे और कथित रूप से जान से मारने की नीयत से लाइसेंसी बंदूक एवं कट्टों से फायरिंग कर दी।
फायरिंग से बचने के प्रयास में वादी पक्ष के संजय सिंह (अधिवक्ता), सूर्यबली सिंह और मणिशंकर सिंह को चोटें आईं। अभियोजन ने घटना के प्रत्यक्षदर्शियों के रूप में विश्वनाथ सिंह, पशुपतिनाथ सिंह सहित अन्य ग्रामीणों का उल्लेख किया।
307 समेत इन धाराओं में दर्ज हुई थी एफआईआर
वादी की तहरीर के आधार पर थाना बांसडीह रोड में छह नामजद अभियुक्तों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धाराओं 147, 148, 149 और 307 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था।
मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से प्रस्तुत साक्ष्यों, गवाहों एवं उपलब्ध अभिलेखों पर विचार करने के बाद अदालत ने छह अभियुक्तों को आरोपों में दोषसिद्ध पाया और प्रत्येक को 10 वर्ष के कारावास तथा अर्थदंड की सजा सुनाई।
क्रॉस केस में अभियोजन नहीं साबित कर सका आरोप
इसी घटना से संबंधित क्रॉस केस में भी अदालत ने साक्ष्यों का परीक्षण किया। न्यायालय के समक्ष आरोपों के पर्याप्त रूप से सिद्ध नहीं होने पर क्रॉस केस के सभी आरोपियों को दोषमुक्त कर बाइज्जत बरी करने का आदेश दिया गया।
न्यायालय के इस फैसले से करीब 20 वर्ष पुराने इस मामले का विधिक रूप से निस्तारण हो गया।
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