बलिया। शहर के सौंदर्यीकरण और पर्यटन को नई पहचान देने के उद्देश्य से करोड़ों रुपये की लागत से शुरू की गई जूही चौपाटी परियोजना आज भी अधूरी पड़ी है। दूसरी ओर कटहल नाला से उठ रही दुर्गंध और गंदगी ने आसपास के लोगों का जीना दूभर कर दिया है।
विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच यह परियोजना अब सवालों के घेरे में है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वर्षों से परियोजना अधर में लटकी हुई है, जबकि नाले की नियमित सफाई और सुधार के अभाव में पूरे इलाके में दुर्गंध फैल रही है।
बरसात के मौसम में स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। नाले से उठती बदबू, गंदगी और जलभराव जैसी समस्याओं के कारण राहगीरों, दुकानदारों और आसपास रहने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय नागरिकों में परियोजना की धीमी प्रगति, कार्यदायी संस्था की कार्यशैली और संबंधित अधिकारियों की उदासीनता को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि जब करोड़ों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, तो आखिर जूही चौपाटी अब तक जनता को क्यों नहीं मिल सकी?
नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि जूही चौपाटी परियोजना की वर्तमान स्थिति स्पष्ट की जाए और कटहल नाला की सफाई व सुधार के लिए ठोस कदम उठाए जाएं। लोगों का कहना है कि शहर के विकास का दावा तभी सार्थक होगा, जब जमीन पर अधूरी परियोजनाएं पूरी हों और आम जनता को बदबू व गंदगी से राहत मिले।
फिलहाल जूही चौपाटी की अधूरी स्थिति और कटहल नाला की बदहाली प्रशासनिक दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।