सुनना - "एक खोयी हुई कला"
हमारे बचपन के दिनों में स्कुल में हमें पढना, लिखना, खेलना और बोलना सिखाया जाता था। लेकीन सुनने की सीख मुश्किल से ही मिलती थी, बल्कि ना के बराबर थी। प्रकृति नें हमें दो कान और एक मुहँ दिया है। बोलने से पहले मानव ने सुनना
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हमारे बचपन के दिनों में स्कुल में हमें पढना, लिखना, खेलना और बोलना सिखाया जाता था। लेकीन सुनने की सीख मुश्किल से ही मिलती थी, बल्कि ना के बराबर थी। प्रकृति नें हमें दो कान और एक मुहँ दिया है। बोलने से पहले मानव ने सुनना
देश, राष्ट्र और राज्य को साधारणतया एक दूसरे का पर्याय समझकर इन शब्दों का उपयोग करके अपना प्रयोजन सिद्ध कर लिया जाता है। देश को अंग्रेजी भाषा में ‘कन्ट्री’ राष्ट्र को ‘नेशन’ और राज्य को ‘स्टेट’ कहा जाता है। इन शब्दों का म...
कृषि कानूनों को वापस ले लेने की घोषणा पर किसान आन्दोलनकारियों ने अपनी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए फिलहाल आन्दोलन समाप्त करने का मूड नहीं बनाया। ये कानून संसद से पारित होकर बने थे जिसकी संवैधानिक प्रक्रिया पर प्रश्न चिन्ह...
पौराणिक मान्यताओं के आधार पर असुर राज विरोचन का साम्राज्य जो वैरोचन साम्राज्य से प्रसिद्ध था, जिसकी राजधानी बलिपुरी थी। विरोचन पुत्र बलि धर्मात्मा स्वभाव का हुआ जिसकी ख्याति तीनों लोको में फैलती जा रही थी। यह जिज्ञासु...
आज सुबह नौ बजे का समय भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में इसलिए याद किया जाएगा कि दो वर्ष पहले प्रस्तावित अपने ही तीन कृषि कानूनों का अचानक प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वापस कर लेने में किसानों उनकी फसलों, बीमा और बाजार को ल...
इतिहास पर दृष्टिपात करने से यह तथ्य स्पष्ट हो जाता है कि भारत कभी भी एक दृष्टिकोण, एकधर्म, एक भाषा, एक भावभूमि अथवा एक व्यवस्था वाला देश नहीं रहा है। भारत में द्रविण संस्कृति सबसे पुरानी मानी जाती है और आर्य लोगों पर विव...
कृषि उत्पादों का न्यूनतम मूल्य तय करने की आवश्यकता के पीछे किसानों को उनके उत्पाद के लिए कम से कम लागत मूल्य निश्चित करना रहा। इसका उद्देश्य किसानों को किसानी से घाटे को बचाना, सरकार को न्यूनतम मूल्य पर अनाजों की खरीद सु...
वर्ष 2021 जिन कारणों से अविस्मरणीय वर्ष माना जायेगा उनमें एक यह भी है कि इस वर्ष में दो व्यक्तियों को संयुक्त रूप से पत्रकारिता में नोबेल पुरस्कार की घोषणा की गयी। इन्होंने अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता को लेकर जो मौलिक कार्...
14 नवम्बर बाल दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस दिन को स्वतन्त्र भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के जन्म दिवस को महत्व प्रदान करने के लिए मनाया जाता है। उनका जन्म इस तिथि को 1889 ई0 में हुआ था। बच्चे उनको सबसे...
जैन धर्म के प्रवर्तक ऋषभ देव थे जो गौतमबुद्ध से लगभग डेढ़ हाजर वर्ष पूर्व पैदा हुए होंगे। महावीर स्वामी इस परम्परा के तेइसवें तीर्थकर रहे। यह धर्म भारत के परम्परागत धर्म से बहुत अलग नहीं था। परम्परागत विचारधारा के अनुसार...
छठ महापर्व व्यवहारिक रूप से एक लोकपर्व है। पृथ्वी सूर्य मण्डल का एक ग्रह है जिस पर सूर्य की बहुमुखी कृपा बनी रहती है। सूर्यमण्डल के अन्य ग्रहों पर यहीं विविधता पूर्ण ईतना विकास नहीं हुआ है जितना की पृथ्वी लोक पर। सूर्य प...
सूर्य के प्रति सम्मान प्रगट करने के लिए ऋग्वेद में कई ऋचाएं है। प्रसिद्ध गायत्री मंत्र भी इसका प्रमाण है। सूर्य अपने मंडल (नक्षत्र परिवार) का केंद्र है। पृथ्वी भी इस परिवार का एक अंग है। प्रकाश, ऊर्जा और ऊष्मा के अतिरिक्...